क्या हैं गर्भाधान के संस्कार 

कृष्णा नारायण 

सा प्रतीत होता है मानों हम सब Destined to head toward DESTRUCTION
बच्चों के शादी की उम्र बढ़ रही है और बच्चियों में menopause का  उम्र घटता जा रहा है|
परिणाम- infertility की समस्या, शास्त्र द्वारा दिए गए दिशा निर्देश को तो हम मानने से इंकार करने लगे हैं लेकिन विज्ञान जब कुछ कहता है हम मान लेते हैं|
विज्ञान क्या कहता है : चिकित्सा विज्ञान कहता ही की वर्तमान में पैदा लेने वाले बच्चों में विकृति बढ़ती जा रही है| बच्चे बहुत सारे विकृतियों के साथ ही पैदा हो रहे हैं| Genetic science के डॉक्टरों के अनुसार युवा पीढ़ी का fertility count, dangerously नीचे गिर रहा है|
परिणाम – शारीरिक और मानसिक रूप से दुर्बल संतान| शारीरिक रूप से दुर्बल संतान अर्थात –
कम Stamina, श्रम नहीं कर सकते, जल्दी थक जाते हैं, इन्फेक्शन बहुत जल्दी लग जाता है|
बीमार होते हैं तो जल्द ठीक नहीं होते| मानसिक रूप से दुर्बल संतान-
Tension,Frustration, Depression, Suicidal instinct
इन सबके शिकार हो जाते हैं| किसी भी प्रकार के समस्या के समाधान के लिए जो मानसिक बल चाहिए वह जन्म से ही नहीं होता| जो जन्म से ही शारीरिक और मानसिक रूप से दुर्बल होता है उसे दुनिया के कोई डॉक्टर ठीक नहीं कर सकता है| ये चिंता के विषय है कि समर्थ संतान कैसे बनेगी जब उनको जन्म देनेवाली युवा पीढ़ी ही समर्थ नहीं है| मेरा विषय चूँकि  ज्योतिष है, इसलिए ज्योतिष क्या कहता है जरा इसे भी जानें-
ज्योतिष के अनुसार – जन्म से लेकर मृत्यु तक सोलह संस्कार हैं जिसमें विवाह संस्कार और गर्भाधान संस्कार हैं| गर्भाधान संस्कार क्यों? इसको इतना महत्व क्यों ?
ज्योतिषशास्त्र बहुत layered है| इसकी परतों को हटाए बिना इसको समझना मुश्किल ही नहीं असंभव है| हमारे जीवन की जब शुरुआत होती है तब अपने पूर्व जन्म के संस्कारों के साथ हम इस जीवन में प्रवेश करते हैं| इसमें माध्यम बनते हैं हमारे माता और पिता और हमारे माता और पिता के संस्कार भी इसमें जुड़ते हैं| पिता के चौदह कुल और माता के पांच कुलों के संस्कार जुड़ता है| 14 को 5 से गुणा करने पर मिला 70 अर्थात 70 कुलों के संस्कार| स्वयं के पूर्व जन्म के संस्कार इसमें जोड़ेंगे तो 70 + 1 = 71, 70 कुलों के गुण और स्वयं के प्रारब्ध मिलकर 71 , जिसे विज्ञान genetic science कहता है, अनुवांशिकी गुण कहता है ज्योतिष उसे संस्कार कहता है| इतने सारे कुल और स्वयं के प्रारब्ध लेकर एक जीव इस संसार में प्रवेश लेने की प्रक्रिया में होता है| तो यह प्रवेश जीव के साथ किसी प्रकार की विकृतियों के प्रवेश न हो, ,जीवन की शुरुआत विकृतियों के साथ न हो, इसके लिए ही ज्योतिष गर्भाधान संस्कार की बात करता है| बहुत सारे लोग कहते हैं की वे इन सभी चीजों को नहीं मानते, लेकिन उनके मानने या न मानने से तो चीजें नहीं होती न, चीजें तो फिर भी होती हैं|
“सम्यक करोति इति संस्कारः” : जो क्रम में नहीं है उसे क्रम में लाना और जो अव्यवस्था है उसे दुरुस्त करना और उसके द्वारा अनुवांशिकी गुण  में परिवर्तन लाना ताकि किसी भी प्रकार के विकृति को जगह न मिले|
इसको रोजमर्रा के जीवन के एक उदहारण से समझें- दही कफ कारक कहा गया है, लेकिन इसी दही का जब मंथन कर दिया जाता है, संस्कार परिवर्तित कर दिया जाता है तो वह छाछ बनकर त्रिदोष हरने वाली हो जाती है| लेकिन कैसा छाछ : लकड़ी के मथनी से बनाया हुआ छाछ, मिक्सी के जार में घुमाकर बनाया गया छाछ नहीं| लकड़ी के मथनी से जब clockwise और anti clockwise दही को घुमाकर छाछ तैयार किया जाता है तब वह सर्व गुणों को रखने वाला हो जाता है|

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