प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी पर क्या आरोप लगाए?

19 सितंबर 2025 को पटना में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर कई गंभीर आरोप लगाए। यह बयान बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले विपक्ष की रणनीति का हिस्सा लगता है, जहां पीके ने एनडीए के पांच प्रमुख नेताओं (सम्राट चौधरी, दिलीप जायसवाल, मंगल पांडेय, संजय जायसवाल और अशोक चौधरी) पर भ्रष्टाचार, हत्या और फर्जीवाड़े के आरोप लगाए। सम्राट चौधरी पर फोकस करते हुए पीके ने उनकी शैक्षणिक योग्यता, आपराधिक इतिहास और नाम बदलने को लेकर तीखी टिप्पणियां कीं।

मुख्य आरोप:

 

पीके ने दावा किया कि सम्राट चौधरी का “नकली” नाम और फर्जी छवि बिहार की राजनीति में पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “यह आदमी इतना फर्जी है कि मैट्रिक की परीक्षा पास ही नहीं की और दावा करते हैं कि मैंने डी.लिट. की डिग्री हासिल की।” पीके ने सुप्रीम कोर्ट के दस्तावेजों और बिहार बोर्ड के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि सम्राट ने खुद को “नाम बदलने के विशेषज्ञ” साबित किया है।

आरोप का प्रकारविवरणपीके का बयान/साक्ष्यशैक्षणिक योग्यतासम्राट चौधरी सातवीं कक्षा फेल हैं, मैट्रिक पास नहीं किया। फिर भी डी.लिट. (कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से) का दावा।सुप्रीम कोर्ट में 1998 के हलफनामे में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने बताया कि सम्राट कुमार मौर्य को मैट्रिक में 234 अंक मिले (फेल)। 2010 के चुनावी हलफनामे में सम्राट ने खुद सातवीं पास बताया। पीके ने सवाल उठाया: “2010 के बाद मैट्रिक कब पास किया?”मर्डर केस और जेल1998 में कांग्रेस नेता सदानंद सिंह समेत छह लोगों की बम से हत्या का आरोपी। जेल गए, लेकिन नाबालिग होने पर छूट गए।पीके ने कहा, “सम्राट कुमार मौर्य उर्फ राकेश कुमार उर्फ सम्राट चौधरी मर्डर के इल्जाम में जेल काटकर आए हैं।” मामला राजद कार्यकाल में गुंडागर्दी से जुड़ा।नकली नाम और उम्रमूल नाम: सम्राट कुमार मौर्य। बाद में राकेश कुमार, फिर सम्राट चौधरी। उम्र में फर्जीवाड़ा कर मंत्री बने।पहली बार मंत्री बनने पर उम्र गड़बड़ी का केस, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। बर्खास्तगी के बाद नाम बदला। पीके बोले, “जनता को गुमराह करने के लिए नाम बदले।”
पीके का आगे का बयान:
पीके ने पत्रकारों से अपील की कि वे सम्राट से सीधे सवाल पूछें: “उपमुख्यमंत्री बताएं कि मैट्रिक कब पास किया?” उन्होंने कहा कि यह राज्य की राजनीति में “पारदर्शिता और जवाबदेही की चुनौती” है। साथ ही, अन्य नेताओं पर भी आरोप लगाते हुए पीके ने केंद्र सरकार को चुनौती दी: “ED-CBI भेजो, जेल भेजवा दो, लेकिन डराओगे नहीं।”
यह बयान बिहार की सियासत में हड़कंप मचा रहा है, क्योंकि सम्राट चौधरी भाजपा के प्रमुख चेहरे हैं। सम्राट या भाजपा की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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