ओवैसी ने महागठबंधन (INDIA ब्लॉक) में शामिल होने के लिए बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव के सामने मुख्य रूप से केवल 6 सीटों की मांग रखी थी। AIMIM के बिहार अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने इस संदर्भ में लालू को दो पत्र लिखे थे—एक लालू के नाम और दूसरा तेजस्वी के नाम—जिसमें गठबंधन का प्रस्ताव रखा गया था। ओवैसी ने दावा किया कि उनकी पार्टी ने BJP के खिलाफ एकजुट लड़ाई लड़ने के लिए यह न्यूनतम मांग रखी थी, और यह भी आश्वासन दिया था कि सत्ता में आने पर AIMIM को कोई मंत्री पद की जरूरत नहीं होगी।
मुख्य बिंदु:
- मांग का विवरण: ओवैसी ने कहा, “हमने सिर्फ 6 सीटें मांगी और… लेकिन RJD की ओर से कोई जवाब नहीं आया।” यह मांग मुख्य रूप से सीमांचल क्षेत्र (जैसे किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार) की मुस्लिम-बहुल सीटों पर केंद्रित थी, जहां AIMIM का मजबूत आधार है। 2020 के चुनाव में AIMIM ने इसी क्षेत्र में 5 सीटें जीती थीं।
- प्रस्ताव की पृष्ठभूमि: अख्तरुल इमान ने सार्वजनिक रूप से और मीडिया के माध्यम से भी गठबंधन की अपील की थी। ओवैसी ने लालू के घर जाकर भी गुहार लगाई, लेकिन कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर गठबंधन नहीं हुआ, तो AIMIM न केवल BJP बल्कि RJD और कांग्रेस के खिलाफ भी लड़ेगी, जिससे विपक्ष के वोट बिखर सकते हैं।
- RJD का रुख: लालू-तेजस्वी ने कोई औपचारिक जवाब नहीं दिया, जिससे AIMIM को ठेंगा दिखाया गया। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि RJD ने AIMIM को गठबंधन से दूर रखने का फैसला किया है, क्योंकि इससे महागठबंधन की धर्मनिरपेक्ष छवि पर सवाल उठ सकते हैं।
ओवैसी ने हाल ही में किशनगंज में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह बयान दिया, जहां उन्होंने कहा कि “अगर वे 6 सीटें भी नहीं दे सकते, तो नतीजे आने के बाद रोना मत।” यह मुद्दा बिहार चुनावी समीकरण को प्रभावित कर रहा है, क्योंकि AIMIM के बिना विपक्ष को सीमांचल में नुकसान हो सकता है।

