साजिश कैसे नाकाम हुई?
गुजरात ATS पिछले एक साल से इस मॉड्यूल पर नजर रख रही थी। केंद्रीय एजेंसियों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर ATS को पता चला कि हैदराबाद के रहने वाले मुख्य आरोपी अहमद मोहिउद्दीन सैयद भारत में आतंकी हमले की साजिश रच रहा है और वह अहमदाबाद पहुंच चुका है। 7 नवंबर 2025 को ATS की टीम ने अहमदाबाद-मेहसाणा हाईवे पर अडलज टोल प्लाजा के पास सैयद की सिल्वर फोर्ड फिगो कार को रोका। कार में हथियार और रासायनिक सामग्री मिली। पूछताछ और फोरेंसिक जांच (मोबाइल फोन और लैपटॉप की) से साजिश का पूरा नक्शा खुला, जिसमें अन्य संदिग्धों के संपर्क और शहरों में रेकी (सर्वे) की डिटेल्स थीं। इसके आधार पर दो अन्य आरोपी बानासकांठा जिले में गिरफ्तार किए गए। यह ऑपरेशन केंद्रीय एजेंसियों (जैसे NIA) और अन्य राज्यों की पुलिस के सहयोग से चला। ATS का दावा है कि यह समय पर कार्रवाई ने बड़ी तबाही रोक ली।
गिरफ्तार आतंकी: कौन हैं ये लोग?
ATS ने तीनों आतंकियों को गिरफ्तार किया, जो ISKP के रेडिकल नेटवर्क से जुड़े थे। ये सभी शिक्षित थे, लेकिन उग्रवादी विचारधारा के शिकार हो चुके थे:
- अहमद मोहिउद्दीन सैयद (35 वर्ष, हैदराबाद): मुख्य आरोपी, चीन से MBBS करने वाला डॉक्टर। वह अपनी मेडिकल नॉलेज का इस्तेमाल रासायनिक हथियार बनाने में कर रहा था। वह ISKP के हैंडलर से टेलीग्राम पर संपर्क में था और फंड जुटाने, नए सदस्य भर्ती करने का काम कर रहा था।
- अजाद सुलेमान शेख (20 वर्ष, शाहजहांपुर/शामली, उत्तर प्रदेश): दर्जी का काम करने वाला, धार्मिक शिक्षा प्राप्त। वह हथियारों की स्मगलिंग में शामिल था और सैयद को पिस्तौल व कारतूस सौंपने वाला था।
- मोहम्मद सुहेल मोहम्मद सलीम खान (23 वर्ष, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश): छात्र, धार्मिक शिक्षा प्राप्त। वह भी हथियार सौंपने और साजिश में सहयोगी था।
तीनों गुजरात में हथियार एक्सचेंज करने और रासायनिक गतिविधियों के लिए आए थे।
प्लान क्या था? (हमलों का निशाना और तरीका)
मॉड्यूल का मकसद भारत में अशांति फैलाना था। उन्होंने अहमदाबाद, दिल्ली और लखनऊ के संवेदनशील स्थानों (सरकारी भवन, सार्वजनिक जगहें) पर रेकी की थी। हमले रासायनिक हथियारों से होने वाले थे, जो बड़े पैमाने पर मौतें पैदा कर सकते थे। ISKP के पाकिस्तान-अफगानिस्तान आधारित नेटवर्क ने इसे निर्देशित किया था।
इस्तेमाल होने वाला हथियार: रिसिन जहर
आतंकियों के पास रिसिन (Ricin) नामक घातक जहर तैयार करने की सामग्री थी, जो साइनाइड से भी ज्यादा खतरनाक है। यह कास्टर ऑयल (अरंडी का तेल) से बनता है, और निगलने, सांस लेने या इंजेक्ट करने से मौत हो जाती है—कोई एंटीडोट नहीं है। ATS ने सैयद के पास से 4 लीटर कास्टर ऑयल जब्त किया, जो हमलों के लिए काफी था। रिसिन को अंतरराष्ट्रीय रासायनिक हथियारों की सूची में शामिल किया गया है। इसके अलावा, हथियार (पिस्तौल, कारतूस) पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए राजस्थान के हनुमानगढ़ में ड्रॉप किए जाते थे, फिर गुजरात के कलोल कब्रिस्तान (डेड ड्रॉप पॉइंट) से उठाए जाते।
हैंडलर और नेटवर्क
मुख्य हैंडलर अबू खादिजा (अफगानिस्तान स्थित, ISKP से जुड़ा) था, जो टेलीग्राम पर निर्देश देता था—हथियार सप्लाई, फंडिंग और भर्ती के बारे में। सैयद के पाकिस्तानी नागरिकों से भी संपर्क थे। यह मॉड्यूल दो अलग ISKP यूनिट्स से जुड़ा था, जो शिक्षित युवाओं को टारगेट करता है। जांच में और गिरफ्तारियां संभावित हैं।







