शारदा यूनिवर्सिटी पर दर्ज करो ज्योति की हत्या और छात्रों को पिटवाने का मुकदमा
गुंडई के बल पर छात्र और छात्राओं में भय पैदा कर रहे निजी शिक्षण संस्थान
चरण सिंह
वाह रे नोएडा के पुलिस प्रशासन। जिस यूनिवर्सिटी के शिक्षकों पर मानिसक उत्पीड़न का आरोप लगाकर शारदा यूनिवर्सिटी की छात्रा ने आत्महत्या की है। उस यूनिवर्सिटी के खिलाफ तो कोई एक्शन लिया नहीं बल्कि यूनिवर्सिटी के छात्रों को मारने लगी। क्या यह आज़ाद भारत है ? जिस तरह से सरकारी एजेंसियां जनता के लिए काम न कर प्रभावशाली लोगों के लिए कर रही हैं। शारदा यूनिवर्सिटी ने जिस तरह से आंदोलन कर रहे छात्रों को पुलिस ने पीटा उसने अंग्रेजी हुकमत की यादें ताजा कर दीं।

देश और प्रदेश में जिस तरह से जनता की आवाज को डंडे के बल पर दबाया जा रहा है यह कृत्य अंग्रेजी हुकूमत को भी पीछे छोड़ने वाला है। इन शिक्षकों पर एफआईआर दर्ज कराने से कुछ नहीं होगा। शारदा यूनिवर्सिटी के प्रबधन खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। बीडीएस की द्वितीय वर्ष की छात्रा ज्योति शर्मा ने आत्महत्या नहीं की बल्कि यूनिवर्सिटी ने यह हत्या की है। आत्महत्या के लिए मजबूर करना भी हत्या ही मानी जाती है।
दरअसल निजी शिक्षण संस्थानों में शिक्षा के नाम पर लूट मचाई जा रही है। ये संस्थान शिक्षण संस्थान नहीं बल्कि धंधा केंद्र बनकर रह गए हैं। ये लोग शिक्षा का धंधा कर रहे हैं। इन्हें किसी बच्चे के भविष्य से कोई लेना देना नहीं हैं। बस पैसा चाहिए। सरकारी स्कूल आप बंद कर देंगे और निजी संस्थानों में विद्यार्थियों को इतना परेशान किया जाएगा कि वे आत्महत्या करने को मजबूर हो जाने लगेंगे। छात्र विरोध दर्ज कराएंगे तो शिक्षण संस्थान के मालिक उन्हें पुलिस से पिटवाएंगे, क्या यही राम राज है ?

क्या हिन्दू मुस्लिम में इतने पागल हो जाओगे कि अपने बच्चों के बारे में भी नहीं सोचेंगे। ज्योति शर्मा इस अराजक माहौल की भेंट चढ़ी है। किसी गलत बात का विरोध नहीं करना है बस हिन्दू मुस्लिम में घुसे रहना है। लोग यह समझने को तैयार नहीं कि इन राजनीतिक दलों, पूंजीपतियों और ब्यूरोक्रेट्स ने यह माहौल बना दिया है कि कुछ भी होता रहे विरोध नहीं होता। यदि कोई थोड़ी बहुत हिम्मत करता भी है तो उसे शारदा यूनिवर्सिटी की तरह पिटवा दिया जाता है। छात्रों के विरोध किया तो यूनिवर्सिटी ने पुलिस बुलाकर छात्रों को पिटवा दिया। पुलिस भी देखिये कि छात्रों की पीड़ा को न समझकर यूनिवर्सिटी का साथ दे रही है। शारदा यूनिवर्सिटी में तो मीडियम फैमली की बच्चे पढ़ते हैं। ये जो आत्महत्या कर रहे हैं।
पुलिस पीट रही है। इनमें से अधिकतर उन परिवारों से होंगे, जिन्हें हिन्दू मुस्लिम के चलते योगी और मोदी सरकार की कोई गलती दिखाई नहीं देती होगी। क्या हिन्दू मुस्लिम में इतने पागल हो जाओगे कि अपने बच्चों को भी नहीं देखोगे ? ये माहौल किसका बनाया हुआ है ? क्या इसमें भी कोई हिन्दू मुस्लिम एंगिल ढूंढ लोगे ? शिक्षा के मंदिरों को इन धंधेबाजों ने क्या बना दिया है ?
दरअसल शारदा यूनिवर्सिटी में बीडीएस की द्वितीय वर्ष की छात्रा ज्योति शर्मा ने शुक्रवार रात को अपने हॉस्टल के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। छात्रा ने सुसाइड नोट में दो प्रोफेसरों, महेंद्र सर और शार्ग मैम पर मानसिक उत्पीड़न और अपमान का आरोप लगाया है। सुसाइड नोट में कहा गया है कि इन्हीं लोगों को उसने अपनी मौत का जिम्मेदार बताया है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि यदि यूनिवर्सिटी में कोई गलत काम हो रहा था तो स्कूल प्रबंधन को पता क्यों नहीं चला ?
दिलचस्प तो यह है कि जब मामले का विरोध करते हुए छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और निष्पक्ष जांच की मांग की तो स्कूल प्रबंधन ने पुलिस को बुलाकर इनकी पिटाई करा दी। बताया जा रहा है कि पुलिस ने नॉलेज पार्क थाने में मामला दर्ज कर दोनों accus ऐड प्रोफेसरों को गिरफ्तार कर लिया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और पुलिस ने परिवार व छात्रों को पारदर्शी जांच का आश्वासन दिया है। यूनिवर्सिटी ने दोनों प्रोफेसरों को निलंबित कर दिया है, और मामले की जांच जारी है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई ? यदि यूनिवर्सिटी में कुछ गलत हो रहा था और प्रबंधन को जानकारी नहीं थी तो फिर उसकी जिम्मेदारी और जवाबदेही क्या है ?








