शेख हसीना को सजा मिलने के बाद ढाका में भड़की हिंसा

17 नवंबर को ढाका की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री सेख हसीना को 2024 के छात्र आंदोलन पर क्रूर दमन के लिए मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई। यह फैसला अनुपस्थिति में (इन एब्सेंशिया) दिया गया, क्योंकि हसीना अगस्त 2024 में सत्ता से हटने के बाद से भारत में निर्वासन में हैं। अदालत ने पाया कि हसीना ने सीधे आदेश देकर सुरक्षा बलों को हेलीकॉप्टरों, ड्रोन और घातक हथियारों से प्रदर्शनकारियों पर हमला करने का निर्देश दिया था, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार 1,400 से अधिक लोग मारे गए और 25,000 से ज्यादा घायल हुए। यह बांग्लादेश की 1971 की स्वतंत्रता युद्ध के बाद की सबसे बड़ी हिंसा थी। हसीना ने फैसले को “राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का मौका नहीं मिला।

 

सजा के तुरंत बाद भड़की हिंसा

 

फैसले के बाद ढाका और अन्य शहरों में तनाव चरम पर पहुंच गया। हसीना की आवामी लीग पार्टी के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए, जिससे पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ झड़पें हुईं। मुख्य घटनाएं इस प्रकार हैं:

ढाका में हमले और आगजनी: प्रदर्शनकारियों ने हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान के ध्वस्त निवास (धनमोंदी इलाका) पर हमला किया, इसे तोड़ने की कोशिश की और सड़क पर आग लगा दी। मोटरसाइकिल सवारों ने मोलोटोव कॉकटेल फेंके, जिससे कई वाहन जलाए गए। पिछले कुछ दिनों में 50 से अधिक आगजनी की घटनाएं और दर्जनों कच्चे बम विस्फोट दर्ज किए गए।
पुलिस पर हमले: कई इलाकों में पुलिस पर पथराव और हमले हुए, जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और रबर बुलेट का इस्तेमाल किया। ढाका के पुलिस प्रमुख ने “शूट ऑन साइट” का आदेश जारी किया, अगर कोई वाहन जलाने या बम फेंकने की कोशिश करे।
हानि और मौतें: अभी तक कोई नई मौत की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पिछले हफ्ते की आगजनी में 2 लोग मारे गए थे। सैकड़ों प्रदर्शनकारी गिरफ्तार किए गए।

सरकारी और सुरक्षा व्यवस्था का जवाब

अंतरिम सरकार (मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में) ने पूरे देश में भारी सुरक्षा तैनाती की। सेना, रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी), बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) और पैरामिलिट्री फोर्सेस को प्रमुख इमारतों और अदालत के आसपास तैनात किया गया।
आवामी लीग को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया गया है, जिससे पार्टी समर्थक और आक्रोशित हैं। हसीना के बेटे सज्जाद हसन ने चेतावनी दी कि अगर प्रतिबंध हटाया नहीं गया, तो चुनावों का बहिष्कार होगा और हिंसा बढ़ सकती है।
बांग्लादेश ने भारत से हसीना की प्रत्यर्पण की मांग की है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

प्रमुख स्थानहिंसा की प्रकृतिसुरक्षा प्रतिक्रियाधनमोंदी (ढाका)हसीना परिवार के घर पर हमला, आगजनीलाठीचार्ज, आंसू गैसमिरपुर और अन्य इलाकेकच्चे बम विस्फोट, वाहन जलानाशूट ऑन साइट आदेश, सेना तैनातीढाका विश्वविद्यालय के पासछात्रों के जश्न पर पथरावपैरामिलिट्री डिप्लॉयमेंट
यह घटना बांग्लादेश की राजनीतिक अस्थिरता को दर्शाती है, जहां 2024 का छात्र आंदोलन अभी भी ताजा है। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने मुकदमे की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं, लेकिन पीड़ित परिवारों ने फैसले का स्वागत किया। स्थिति तेजी से बदल रही है, इसलिए नवीनतम अपडेट के लिए समाचार स्रोतों पर नजर रखें।

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