इस्तीफे का आधिकारिक कारण
धनखड़ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपने इस्तीफे में लिखा, “स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और चिकित्सीय सलाह का पालन करने के लिए, मैं संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के अनुसार, तत्काल प्रभाव से भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देता हूं।” मार्च 2025 में उनकी एंजियोप्लास्टी हुई थी और वे कुछ समय के लिए एम्स में भर्ती थे, जो उनके स्वास्थ्य कारणों को विश्वसनीय बनाता है।
महाभियोग प्रस्ताव और विवाद
महाभियोग का मुद्दा: धनखड़ के इस्तीफे से ठीक पहले, 21 जुलाई को उन्होंने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ 63 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर वाले महाभियोग प्रस्ताव नोटिस को स्वीकार किया था। उसी दिन, लोकसभा में सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के 100 से अधिक सांसदों ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया।
विपक्ष का आरोप: दिसंबर 2024 में, विपक्षी दलों ने धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया था, जिसमें उन पर पक्षपातपूर्ण आचरण का आरोप लगाया गया। यह प्रस्ताव तकनीकी आधार पर खारिज हो गया था, लेकिन इससे धनखड़ और विपक्ष के बीच तनाव बढ़ गया।
क्रेडिट की लड़ाई? : कुछ अटकलों के अनुसार, जस्टिस वर्मा के महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार करने का श्रेय लेने की होड़ या इस मुद्दे पर सरकार और धनखड़ के बीच मतभेद हो सकते हैं। एक एक्स पोस्ट में दावा किया गया कि सरकार धनखड़ के खिलाफ महाभियोग की योजना बना रही थी और भाजपा सांसदों के हस्ताक्षर भी जुटाए गए थे, जिसके दबाव में धनखड़ ने इस्तीफा दिया। हालांकि, यह दावा असत्यापित है।
सरकार से खाई?
किसानों के मुद्दे: कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि धनखड़ पिछले कुछ समय से किसानों के मुद्दों पर सरकार के रुख से असहमत थे। उन्होंने इसे सार्वजनिक मंचों पर उठाया था, जिससे सरकार के साथ उनकी खाई बढ़ी हो सकती है।
विपक्ष का दावा: कांग्रेस सांसद नीरज डांगी ने कहा कि धनखड़ का इस्तीफा उनकी मर्जी से नहीं, बल्कि सरकार के दबाव में लिया गया फैसला हो सकता है। कांग्रेस के जयराम रमेश ने भी सुझाव दिया कि इस्तीफे के पीछे “जो दिख रहा है, उससे कहीं ज्यादा” है और यह किसान समुदाय के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
टाइमिंग पर सवाल: धनखड़ ने मानसून सत्र के पहले दिन (21 जुलाई) पूरे दिन सक्रियता से संसद की कार्यवाही संचालित की। शाम 5:45 बजे वे जयराम रमेश और अन्य सांसदों से मिले, और रात 9 बजे अचानक इस्तीफा दे दिया। यह त्वरित निर्णय और 23 जुलाई को प्रस्तावित जयपुर दौरे की घोषणा के बावजूद इस्तीफा देने से संदेह बढ़ा।
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विपक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस: जयराम रमेश ने धनखड़ से इस्तीफे पर पुनर्विचार करने और पीएम मोदी से उन्हें मनाने की अपील की।






