दिल्ली हाईकोर्ट से यूट्यूबर अजीत भारती को झटका लगा है। अदालत ने उत्तर प्रदेश स्थित नगीना से लोकसभा सांसद चंद्रशेखर आजाद की शिकायत पर एससी-एसटी एक्ट के तहत एक मामले में भारती को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। भारती पर नगीना के सांसद चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ कथित तौर पर जातिसूचक टिप्पणी करने का मामला दर्ज है। जस्टिस सौरभ बनर्जी ने भारती की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी।
16 सितंबर को फैसला रखा था सुरक्षित
कोर्ट ने भारती, दिल्ली पुलिस और शिकायतकर्ता आजाद के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद 16 सितंबर को याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। आजाद की शिकायत के बाद भारती ने ट्रायल कोर्ट का रुख किया. वहां से अर्जी खारिज होने के बाद भारती, हाईकोर्ट गए। सुनवाई के दौरान भारती की याचिका का दिल्ली पुलिस ने विरोध किया था।
पुलिस, आजाद और भारती के वकीलों ने अदालत में क्या दलील दी?
सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर वकील ने अदालत से कहा कि आरोपी द्वारा कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए शब्द सीधे तौर पर एक खास जाति का अपमान करते हैं, वहीं सांसद की ओर से पेश अधिवक्ता ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि कथित टिप्पणियां अपमानजनक और जानबूझकर की गईं, उधर, भारती के वकील ने राहत की मांग करते हुए कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (SC/ST एक्ट) लागू नहीं होता क्योंकि इसमें कोई जानबूझकर अपमान या बेइज्जती नहीं की गई थी और यूट्यूबर की टिप्पणियों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए जिसमें वे की गई थीं।
नगीना सांसद ने शिकायत में आरोप लगाया है कि भारती ने सोशल मीडिया पर उनके, अनुसूचित जाति समुदाय के सदस्यों और बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के खिलाफ जाति-आधारित, अपशब्दों से भरे, अपमानजनक और बेइज्जत करने वाले बयान दिए. FIR एससी-एसटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत दर्ज की गई थी. ट्रायल कोर्ट ने अग्रिम जमानत से इनकार कर दिया था।

