चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर सियासी बवाल नए सिरे से शुरू हो गया है। दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र, कर्नाटक, झारखंड और बंगाल के आंकड़ों पर विपक्षी पार्टियां सवाल उठा रही है। झारखंड को लेकर दावा है कि बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने नाम वोटर लिस्ट से नाम कटवाने की कोशिश की। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, गोड्डा में बीजेपी का बूथ लेवल एजेंट (BLA) फॉर्म 7 लेकर आता है और ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल वोटरों के नाम हटाने की मांग करता है। हालांकि कम से कम चार बूथों पर बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) ने आवेदनों को लेने से इनकार कर दिया, उन्हें ये आवेदन असली या प्रक्रिया के हिसाब से सही नहीं लगे.दावा है कि मुस्लिम वोटर्स के नाम कटवाने की कोशिश हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, जिन वोटर्स के नाम कटवाने की कोशिश हुई वे पीढ़ियों से उस गांव में रह रहे हैं. साथ ही 2003 में वोटर लिस्ट के बड़े रिविजन के दौरान उनमें से कई लोगों का वेरिफिकेशन भी हो चुका है. चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक इससे SIR में उन्हें शामिल करना आसान हो जाता है.
कपिल सिब्बल ने उठाए सवाल
इस रिपोर्ट पर राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कोई कार्यकर्ता वोटर लिस्ट को लेकर कह सकता है कि ये बंदा इस गली में नहीं रहता है और नाम काटना चाहिए. फॉर्म 7 ब्लक से फाइल हो जाते हैं, फिर उसका नाम कट जाता है. बीएलओ इसकी जांच करता है, यहां बीएलओ ने विरोध किया. आप कैसे कर सकते हैं? इसका नाम क्यों काटें?”
उन्होंने कहा, ”अखबार ने जांच की, इसमें पता चला की मुस्लिम को निशाना बनाया जा रहा है. आजादी के समय से ये लोग रह रहे थे. झारखंड में विपक्ष की सरकार है तो वहां ज्यादा दबाव नहीं डाल सकते. जहां इनकी सरकार है, वहां उन्होंने हद मचा दी. यही हो रहा है तो चुनाव का मतलब क्या है. ये बात हमें समझनी चाहिए. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का मकसद है कि एक रास्ता बीजेपी को दो, जो बीजेपी का वोटर नहीं है, उसका नाम काट दो।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
इससे एक दिन पहले सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एसआईआर को लेकर बीजेपी को घेरा था. उन्होंने एक्स पर लिखा, ”भाजपा और ‘वोट चोरी आयोग’ के तरीके बदलते रहते हैं, और बदलते रहेंगे – मकसद बस एक ही है: किसी भी क़ीमत पर BJP की जीत, और भारत के लोकतंत्र का अंत. महाराष्ट्र 2024 – लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच अचानक 39 लाख नए वोटर जुड़ गए. मैंने तब भी कहा था, आज भी कहता हूँ। यह वोट चोरी थी।
उन्होंने आगे कहा, ”बंगाल 2026 – SIR में जिन नामों को काटा गया, उनमें से 91 प्रतिशत नाम अपील के बाद वापस जोड़ने पड़े. यानी हर 10 में से 9 नाम गलत तरीके से काटे गए, और नाम चुनाव के बाद ही जोड़े गए. मैंने तब भी कहा था, आज भी कहता हूं: यह वोट चोरी थी. और अब महाराष्ट्र में 2.07 करोड़ मतदाताओं को ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर कर दिया गया है – यानी हर पांचवां वोटर. लोक सभा 2024: 9.29 करोड़, विधान सभा 2024: 9.7 करोड़, SIR 2026: 7.78 करोड़, कौन सी लिस्ट सही थी? वोट चोरी से बनी सरकार के लिए जनता ज़रूरी नहीं है – यही कारण है कि ये BJP न जनता की सुनती है, न उनका आदेश मानती है।
महाराष्ट्र के अधिकारी ने क्या कहा?
महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी ने सोमवार को बताया कि SIR प्रक्रिया के बाद जारी ड्राफ्ट रोल में 2.06 करोड़ से ज्यादा वोटर शामिल नहीं हैं, जो महाराष्ट्र के पिछले वोटर बेस का 21.14 प्रतिशत है. ड्राफ्ट रोल में अभी 7.71 करोड़ से ज्यादा वोटर हैं, जो पिछले वोटरों की संख्या का 78.86 प्रतिशत है. उन्होंने कहा कि लगभग 2.06 करोड़ लोगों को ड्राफ्ट रोल में शामिल नहीं किया गया क्योंकि उनके एन्यूमरेशन फॉर्म इकट्ठा नहीं किए जा सके, वे या तो मिल नहीं रहे थे, उनकी मौत हो चुकी थी या उन्होंने घर बदल लिया था।
दिल्ली में भी बवाल
वोटर लिस्ट के SIR के तहत सोमवार को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हर तीन में से एक वोटर का नाम हटा दिया गया। 1.45 करोड़ वोटरों की लिस्ट में से 47 लाख से ज्यादा वोटरों को हटाया गया। इनमें से 43.32 लाख से ज्यादा वोटर या तो कहीं और चले गए थे या SIR के दौरान नहीं मिले।
दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) के ऑफिस से जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के मुताबिक, 2.82 लाख से ज्यादा वोटर मृत पाए गए, जबकि 1.41 लाख से ज्यादा वोटर कई जगहों पर रजिस्टर्ड थे। अधिकारियों ने बताया कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR हुआ है, उनमें दिल्ली में ड्राफ्ट स्टेज पर सबसे ज्यादा (33 प्रतिशत) नाम हटाए गए हैं।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजिक अरविंद केजरीवाल ने इसपर तंज कसते हुए कहा कि SIR के तहत दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट आ गई है. 1.5 करोड़ में से 47 लाख वोटर के नाम नहीं हैं. भारत सरकार नाहक ही जनसंख्या को लेकर परेशान हो रही है। SIR के ज़रिए चुनाव आयोग हमारे देश की जनसंख्या 140 करोड़ से घटाकर 50 करोड़ कर देगा।
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी आरोप लगाती रही है कि एसआईआर की वजह से बीजेपी जीती. 28 अगस्त को ममता बनर्जी ने टीएमसी के कार्यक्रम में कहा, ”बीजेपी ने चुनाव आयोग का इस्तेमाल करके विधानसभा चुनाव को हाईजैक कर लिया। वोटर लिस्ट से लाखों नाम गैर-कानूनी तरीके से हटाकर वोट लूटने के लिए एसआईआर का इस्तेमाल किया गया।
पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के SIR की प्रक्रिया के तहत लगभग 36.6 लाख मामलों का निपटारा होना अभी बाकी है. मामला अपीलेट ट्रिब्यूनल में पेंडिंग है. इसको लेकर मुस्लिम नेताओं में खास तौर पर चिंता देखी गई है। हाल ही में टीएमसी के बागी युसूफ पठान ने ट्रिब्यूनल के काम में तेजी के लिए गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखा था।
कर्नाटक में भी उठे सवाल
वहीं कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने शनिवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लिखा पत्र शेयर किया. इस पत्र में राज्य में SIR प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर और बिना किसी उचित कारण के नाम हटाए जाने पर चिंता जताई गई है। शिवकुमार ने 25 अगस्त को CEC को पत्र लिखकर कर्नाटक में वोटर लिस्ट के SIR के दौरान वेरिफिकेशन के लिए पर्याप्त समय और तय प्रक्रिया का सख्ती से पालन करने की मांग की थी. उन्होंने दावे और आपत्तियां दर्ज करने की समय-सीमा बढ़ाने का भी अनुरोध किया था।
डीके शिवकुमार ने कहा कि 1.08 करोड़ से ज्यादा वोटरों को ASDDO के तौर पर मार्क किया गया है. लगभग 43 लाख वोटर्स को लॉजिकल गड़बड़ियों के लिए नोटिस भेजे जाने हैं. मैंने सीईसी ज्ञानेश कुमार से ये कदम उठाने के लिए कहा है।
एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग अपनी पीठ थप-थपाता रहा है. पिछले दिनों ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा था कि भारत की चुनाव प्रक्रिया को दूसरे देशों में भी देखा और समझा जा रहा है. कई देश भारत के चुनाव आयोग के काम से सीखना चाहते हैं और अपने यहां भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाने में रुचि रखते हैं. हाल हीमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एसआईआर को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था और भारत की तारीफ की थी।

