उत्तर प्रदेश भाजपा को इस हफ्ते नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने वाला है। पार्टी ने 84 जिलों के 327 प्रदेश परिषद सदस्यों के नाम घोषित कर दिए हैं, जो अध्यक्ष चुनाव में वोटिंग करेंगे। मौजूदा अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, और भाजपा 2026 के पंचायत चुनाव व 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने की तैयारी में है। नाम की घोषणा 16 दिसंबर से शुरू हो रहे खरमास से पहले होने की संभावना है, शायद 12 दिसंबर को ही।
रणनीति: गैर-यादव ओबीसी पर दांव
भाजपा समाजवादी पार्टी के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले का जवाब देने के लिए गैर-यादव ओबीसी चेहरे पर दांव खेल रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पीडीए रणनीति ने भाजपा को नुकसान पहुंचाया था, इसलिए अब 2017 वाली फॉर्मूला पर वापसी का प्रयास है। ओबीसी वोटबैंक को एकजुट करने का मकसद है, खासकर अखिलेश यादव की PDA रणनीति की काट।
संभावित उम्मीदवार
सूत्रों के मुताबिक, सर्वसम्मति से नाम चुना जाएगा। चर्चा में ये नाम हैं:
धर्मपाल सिंह: योगी सरकार के मंत्री, गैर-यादव ओबीसी समुदाय से।
बीएल वर्मा: केंद्रीय मंत्री, गैर-यादव ओबीसी।
साध्वी निरंजन ज्योति: पूर्व सांसद, निषाद समुदाय से (गैर-यादव ओबीसी)।
एक्स (पूर्व ट्विटर) पर भी इसकी चर्चा जोरों पर है। एनडीटीवी इंडिया ने ब्रेकिंग न्यूज में 12 दिसंबर को घोषणा की संभावना बताई है, जबकि आज तक ने ओबीसी रणनीति पर फोकस किया। पुराने चेहरों जैसे केशव प्रसाद मौर्य या स्वतंत्र देव सिंह के बजाय नया चेहरा चुनने की बात भी हो रही है।








