“उम्र नहीं समझदारी हो विवाह का आधार “

समय रहते विवाह और समाज की भूमिका: एक संवेदनशील पहल की आवश्यकता

दिनेश कुमार कुशवाहा

आज के सामाजिक परिवेश में उचित वर-वधू, घर और नौकरी की तलाश में लड़के-लड़कियों की उम्र अक्सर निकल जाती है। इस स्थिति में जब विवाह योग्य जोड़ी का मिलना कठिन हो जाता है, तो न केवल युवा मानसिक तनाव से गुजरते हैं, बल्कि उनका परिवार भी चिंता और सामाजिक दबाव का शिकार होता है।

शहरी क्षेत्रों में तो फिर भी बच्चे अपने माता-पिता से खुलकर बात कर लेते हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी जटिल है। वहाँ आज भी बहुत-से युवा अपने मन की बात कह नहीं पाते। परिणामस्वरूप, जब लड़की की उम्र अधिक हो जाती है, तो उसके अनुरूप वर मिलना कठिन हो जाता है, और यदि लड़का उम्र में बड़ा हो जाए तो उसके लिए भी उपयुक्त वधू मिलना मुश्किल हो जाता है। इस असंतुलन का सीधा असर मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक माहौल और सामाजिक दृष्टिकोण पर पड़ता है।

इस विषय की एक और संवेदनशील परत है — विधवा-विधुर एवं तलाकशुदा युवक-युवतियाँ। कुछ दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों में शादी के कुछ ही महीनों या वर्षों बाद पति या पत्नी की मृत्यु हो जाती है, या किसी कारणवश तलाक हो जाता है। ऐसे में व्यक्ति अकेला पड़ जाता है। समाज और परिवार की सोच ऐसी होती है कि दोबारा विवाह की बात करने में भी संकोच होता है। कभी व्यक्ति स्वयं पहल नहीं कर पाता, तो कभी उसके परिवार के लोग उसे लेकर समाज की सोच से डरते हैं।

 

समाज को अब आगे आना होगा

 

आज ज़रूरत है कि समाज के जागरूक और संवेदनशील लोग इस दिशा में पहल करें। ऐसे परिवारों से संवाद स्थापित किया जाए, जहां लड़के या लड़कियाँ किसी कारणवश विवाह योग्य उम्र पार कर चुके हैं या जिनका वैवाहिक जीवन टूट चुका है। उन्हें एक नई शुरुआत का अवसर दिया जाना चाहिए।
“सेकंड मैरिज” या “द्वितीय विवाह” कोई शर्म की बात नहीं है, बल्कि यह एक नया जीवन, नई उम्मीद और सम्मानजनक भविष्य का द्वार खोलता है।

यदि समाज इस दिशा में मानवीय संवेदनाओं के साथ कार्य करे, तो न केवल कई टूटे हुए जीवन फिर से संवर सकते हैं, बल्कि कई माता-पिता की चिंता भी दूर हो सकती है। हर व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है — चाहे वह अविवाहित हो, विधुर हो, विधवा हो या तलाकशुदा।

 

 एक विचार जो बदलाव ला सकता है

 

इस लेख के माध्यम से मैंने जो कुछ लिखा है, वह मेरे निजी अनुभवों और सामाजिक निरीक्षणों पर आधारित है। यह एक व्यक्तिगत विचार नहीं, बल्कि समाज की सच्चाई है — जिसे समझने और स्वीकारने की आवश्यकता है।

यह विचार अत्यंत सार्थक और प्रेरणादायक है। यदि मीडिया, सामाजिक संस्थाएँ और समुदाय मिलकर इस पर कार्य करें, तो हजारों जीवन फिर से मुस्कुरा सकते हैं।

यह विचार क्यों महत्वपूर्ण है?

✅ समाज में मौन पीड़ा को आवाज़ देता है
✅ विवाह को लेकर उम्र, स्थिति और परिस्थिति के भेदभाव को तोड़ता है
✅ विधुर/विधवा और तलाकशुदा लोगों के लिए पुनः सम्मानजनक जीवन की वकालत करता है
✅ माता-पिता और परिवार की मानसिक चिंता को कम कर सकता है
✅ समाज में समरसता, संवेदना और सहयोग की भावना को बढ़ाता है

  • Related Posts

    दिल्ली सीजेपी आंदोलन ने बनाई विशेष पहचान!
    • TN15TN15
    • July 22, 2026

    खाना-पानी की व्यवस्था के साथ ही व्यवस्थित रूप…

    Continue reading
    सरकार से दो-दो हाथ करने के मूढ़ में दिल्ली पहुंचा देश का युवा!
    • TN15TN15
    • July 21, 2026

    20 को दिल्ली में संसद मार्च के बाद…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    CJP नेताओं ने सरकार के साथ बातचीत से किया इनकार, पहले रखी शर्त, अब क्यों कहा No

    • By TN15
    • July 23, 2026
    CJP नेताओं ने सरकार के साथ बातचीत से किया इनकार, पहले रखी शर्त, अब क्यों कहा No

    दिल्ली प्रोटेस्ट में विदेशी फंडिंग? याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने तुरंत सुनवाई के लिए भरी हामी

    • By TN15
    • July 23, 2026
    दिल्ली प्रोटेस्ट में विदेशी फंडिंग? याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने तुरंत सुनवाई के लिए भरी हामी

    PM के संदेश के बाद अभिजीत दीपके का धर्मेंद्र प्रधान पर तंज, फोटो शेयर कर लिखा- ‘Hi, मेरा नाम कुछ नहीं है’

    • By TN15
    • July 23, 2026
    PM के संदेश के बाद अभिजीत दीपके का धर्मेंद्र प्रधान पर तंज, फोटो शेयर कर लिखा- ‘Hi, मेरा नाम कुछ नहीं है’

    ‘अगर मैं आज जंतर-मंतर पर दिखाई न दूं तो…’, अभिजीत दीपके ने प्रदर्शनकारियों से ये क्यों कहा?

    • By TN15
    • July 23, 2026
    ‘अगर मैं आज जंतर-मंतर पर दिखाई न दूं तो…’, अभिजीत दीपके ने प्रदर्शनकारियों से ये क्यों कहा?

    दिल्ली मेट्रो के 16 स्टेशन बंद करने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI सूर्यकांत बोले- ‘अगर लंच के समय तक…’

    • By TN15
    • July 23, 2026
    दिल्ली मेट्रो के 16 स्टेशन बंद करने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI सूर्यकांत बोले- ‘अगर लंच के समय तक…’

    अस्पताल से सोनम वांगचुक ने सरकार को लिखी चिट्ठी, अनशन खत्म करने को तैयार, रखी शर्त

    • By TN15
    • July 22, 2026
    अस्पताल से सोनम वांगचुक ने सरकार को लिखी चिट्ठी, अनशन खत्म करने को तैयार, रखी शर्त