दौसा में दिल्ली मुंबई हाईवे पर गर्भवती नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप, प्रसव हुआ !
लड़की को कलेक्ट्रेट के पास फेंक भागे दरिंदे, नवजात को कपड़े में लपेट अस्पताल पहुंची पीड़िता
यौन शोषण की शिकार नाबालिग का अपहरण कर दिया हैवानियत को अंजाम
चरण सिंह
दौसा/जयपुर/नई दिल्ली। देश के हालात कितने ख़राब हो चुके हैं। इसका अंदाजा इस दर्दनाक घटना से समझ में आ जाएगा। एक नाबालिग लड़की का अपहरण कर उसके साथ गैंगरेप किया गया। हैवानियत के दौरान इस लड़की का प्रसव हो गया। मतलब इस लड़की के साथ पहले से हैवानियत बरती जा रही थी। ऐसा भी नहीं है कि यह कोई पहली घटना हो। इस तरह की घटनाएं देश में आम हो गई हैं। देश की स्थिति मुर्गे जैसी हो गई है। जिसका नंबर आता वही चिल्लाता है। न तो किसी को कानून का डर है और न ही समाज का। पर किसी को क्या ? लड़ते रहो जाति और धर्म के नाम पर। इस्तेमाल होते रहो राजनीतिक दलों और प्रभावशाली लोगों के हाथों। इस विषाक्त माहौल में बचने वाला कोई नहीं है।
देश में बहुत लोग धर्मों के ठेकेदार बने घूम रहे हैं। हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई, सिख धर्म के ठेकेदार बने हुए हैं। सवर्णों, पिछड़े, दलितों के नाम पर जमकर राजनीति की जा रही है। समाज के ये ठेकेदार इस तरह की घटनाओं में कहीं नहीं दिखाई देते। इस वारदात को 3 युवकों ने अंजाम दिया है। इन युवकों ने उसे अगवा किया था। क्या मनोस्थिति रही होगी इस लड़की की ? जिसके साथ पहले से ही हैवानियत की जा रही थी उसके साथ गैंगरेप किया गया।
बताया जा रहा है कि पीड़ित लड़की को तीन दरिदों ने किडनैप किया था। वारदात के बाद आरोपी पीड़ित लड़की को कलेक्ट्रेट चौराहे पर छोड़कर भाग गए। मामला कितना दर्दनाक है कि पीड़िता किसी तरह कपड़ों में लिपटी नवजात को लेकर अस्पताल पहुंची थी। नवजात की मौत हो चुकी है और पीड़िता अस्पताल में भर्ती है। यदि यह मामला राजनीतिक होता तो अब तक सड़कों से लेकर मीडिया तक कोहराम मच जाता क्योंकि यह मामला एक बेबस लड़की का है। किसी को क्या ? सबके अपने स्वार्थ हैं।
उत्तराखंड में अंकिता भंडारी कांड से बड़ा उदाहरण तो कहीं मिल ही नहीं सकता। जिस पार्टी का प्रधानमंत्री बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ का नारा देता है। उस पार्टी का जो नेता अंकिता भंडारी कांड में आरोपी है। सीबीआई जांच चल रही है। उसे राज्यपाल बना दिया गया है। बताया जा रहा है कि राज्यपाल उसे बचाने के लिए बनाया गया है। क्योंकि राज्यपाल और राष्ट्रपति पद पर रहते हुए किस प्रकार का कोई का मामला दर्ज नहीं हो सकता है।
यह अपने आप में शर्मनाक है कि अंकिता भंडारी के माता पिता ने जब आवाज उठाई कि जब तक सीबीआई की जांच नहीं हो जाती तब तब इस नेता को राज्यपाल न बनाया जाए। उनकी बात सुने बिना उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया गया। राजस्थान दौसा में मुंबई दिल्ली हाईवे पर हुई इस दरंदिगी के खिलाफ कितने संगठन सामने आये हैं ? सबको बस राजनीति करनी है।







