अमेरिका के दबाव में कहीं वेनेजुएला जैसे स्थिति न बन जाए हमारी ?

पूरी तरह से गड़बड़ा गई है भारत की अर्थव्यवस्था, पीएम मोदी विदेशी दौरे में मस्त

चरण सिंह 
1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध के बाद सूखा पड़ने के कारण जब देश में खाद्यान का बड़ा संकट पैदा हो गया तो तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने सीधे जनता से व्रत रखने अपील नहीं कर दी थी। पहले उन्होंने अपने परिवार को सप्ताह में एक समय का भोजन त्यागने के लिए तैयार किया और उसके बाद आकाशवाणी से जनता से सप्ताह में एक समय का भोजन त्यागने की अपील की। तब भी अमेरिका ने गेहूं के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था पर शास्त्री जी किसी दबाव में नहीं आए, संकट का डटकर सामना किया और जनता ने भी उनका साथ दिया। देश खाद्यान्न संकट से उबार और देश में हरित क्रांति आई।
मौजूदा प्रधानमंत्री क्या कर रहे हैं ? पूरी तरह से अमेरिका के दबाव में हैं। ईरान पर हमले से एक दिन पहले अमेरिका के दबाव में इजराइल हो आए। ईरान पर हमले की निंदा भी न कर सके। हां जब ईरान ने यूएई पर हमला किया तो उसकी निंदा जरूर किया। मतलब युद्ध को टालने के प्रयास तो छोड़िये उल्टे एक तरह से युद्ध के पक्ष में खड़े नजर आये। अब पश्चिम एशिया संकट के नाम पर देश में पेट्रोल और गैस बचत करते हुए विदेशी दौरे कम करने की अपील कर रहे हैं। वह बात दूसरी है कि खुद जमकर विदेशी दौरे कर रहे हैं। वैसे भी 2014 से विदेशी दौरे ही कर रहे हैं पर इन दौरे के कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आए।
आज देश के सामने तमाम संकट इसलिए खड़े हो गए हैं कि क्योंकि सरकार ने किसी समस्या का हल करने का प्रयास ही नहीं किया। मीडिया को हाइजेक कर जनता को भ्रमित करती रही। क्या कोई देश किसी देश पर किसी देश से कुछ खरीदने और बेचने पर प्रतिबंध लगा सकता है ?पर अमेरिका ने लगा रखा है। बिना अमेरिका की अनुमति के भारत रूस से तेल और गैस नहीं खरीद सकता है। अभी हाल में अमेरिका के दबाव में रूस का गैस का एक टैंकर वापस कर दिया गया। इस संकट के समय रूस तेल और गैस देने को तैयार है पर अमेरिका के दबाव में मोदी सरकार बेबस नजर आ रही है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि जब अमेरिका के दबाव में कोई सरकार नहीं आई तो फिर मोदी सरकार क्यों आ रही है ?
बताया जा रहा है कि पीएम मोदी अपने मित्र गौतम अडानी के एहसानों के नीचे इतने दबे हैं कि उन्हें प्रधानमंत्री तो जनता ने बनाया है पर वह काम अडानी के लिए कर रहे हैं। अमेरिका के दबाव का कारण भी अडानी ही बताया जा रहा है। जानकारी मिल रही है कि मोदी सरकार अमेरिका के साथ जो कृषि ट्रेड डील करने जा रही है वह तो देश को पूरी तरह से बर्बाद कर देगी। अमेरिका के किसानों के सस्ते प्रोडक्ट भारत आएंगे और भारत के किसान पिछड़ते चले जाएंगे। जो काम अमेरका के वेनुजुएला के साथ किया वही भारत के साथ कर रहा है। ऐसे ही अमेरिका के दबाव में निर्णय लिए जाते रहे तो कहीं हमारे देश की स्थिति भी वेनुजुएला जैसे न हो जाए।
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