प्रियंका चतुर्वेदी (शिवसेना UBT की राज्यसभा सांसद) ने UGC के नए Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 (जिसे UGC इक्विटी रेगुलेशंस या UGC बिल/नियम के रूप में जाना जा रहा है) पर बड़ा बयान दिया है। ये नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान, विकलांगता आदि आधार पर भेदभाव रोकने के लिए लाए गए हैं, खासकर SC, ST और OBC छात्रों के खिलाफ जातिगत भेदभाव को लक्ष्य बनाते हुए। लेकिन इनके विरोध में सवर्ण/जनरल कैटेगरी के संगठन और छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं, दावा करते हुए कि ये नियम एकतरफा हैं और जनरल कैटेगरी के खिलाफ भेदभाव बढ़ा सकते हैं या झूठे केसों का खतरा पैदा कर सकते हैं।
प्रियंका चतुर्वेदी का बयान मुख्य रूप से उनके X (ट्विटर) पोस्ट से आया है, जहां उन्होंने कहा:
“कैंपस में किसी भी प्रकार का जातिगत भेदभाव गलत है, और भारत में पहले ही कई छात्र इसके दुष्परिणाम झेल चुके हैं। लेकिन क्या कानून को समावेशी नहीं होना चाहिए और यह सुनिश्चित नहीं करना चाहिए कि सभी को समान रूप से संरक्षण मिले? फिर कानून के लागू होने में यह भेदभाव क्यों? झूठे मामलों की स्थिति में क्या होगा? दोष का निर्धारण कैसे किया जाएगा? भेदभाव को कैसे परिभाषित किया जाए- शब्दों से, कार्यों से या धारणाओं से? कानून की लागू होने की प्रक्रिया स्पष्ट, सटीक और सभी के लिए समान होनी चाहिए। अतः कैंपस में नकारात्मक माहौल बनाने के बजाय, मैं आग्रह करती हूँ कि UGC की यह अधिसूचना या तो वापस ली जाए या उसमें आवश्यक संशोधन किया जाए।”







