हाल ही में उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती को लेकर दो प्रमुख दलित नेताओं के बीच तीखा विवाद छिड़ गया है। कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद उदित राज ने मायावती पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके “दिल में कमल” (यानी BJP की नीतियों का समर्थन) है, जबकि जूबान पर डॉ. अंबेडकर का नाम लिया जाता है। इस बयान का जवाब देते हुए BSP के राज्यसभा सांसद रामजी गौतम ने उदित राज को “चमचा” (सिर्फ आकाओं का तलुआ चाटने वाला) करार दे दिया। यह विवाद 28 सितंबर 2025 को शुरू हुआ और सोशल मीडिया व राजनीतिक हलकों में तेजी से फैल गया।
विवाद की शुरुआत: उदित राज का हमला
डॉ. उदित राज, जो कभी BSP में थे, फिर BJP से दिल्ली सांसद बने और अब कांग्रेस में हैं, ने 28 सितंबर को लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान मायावती पर तंज कसा। उन्होंने कहा, “मायावती के दिल में कमल है और जूबान पर अंबेडकर।” उनका आरोप था कि BSP प्रमुख बहुजन आंदोलन को कमजोर कर रही हैं और दलित-ओबीसी एकता के बजाय BJP की मदद कर रही हैं। उदित राज ने आगे कहा कि कांशीराम की पुण्यतिथि पर BSP का शक्ति प्रदर्शन वोटों को बांटने का काम करेगा, जिसका फायदा BJP को मिलेगा।
यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जहां कई यूजर्स ने इसे दलित एकता के खिलाफ बताया। उदित राज ने बाद में स्पष्ट किया कि उनका इरादा बहुजन मिशन को मजबूत करने का था, न कि व्यक्तिगत हमला।
रामजी गौतम का कड़ा जवाब: “चमचा” और “दो कौड़ी की औकात”
BSP सांसद रामजी गौतम ने उदित राज के बयान पर तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “जब बसपा आगे बढ़ रही है तो विपक्षी पार्टियां अपने चमचों को एक्टिव कर इस तरह की अनर्गल बातें करवा रही हैं। उदित राज की बुद्धि अब काम नहीं कर रही, इसीलिए ऐसी बेफिजूल बातें कर रहे हैं।” गौतम ने मायावती के चार बार के शासन का हवाला देते हुए कहा कि बहनजी ने दलितों को आत्मसम्मान, शिक्षा, रोजगार और हर क्षेत्र में भागीदारी दी। उन्होंने उदित राज को “दो कौड़ी की औकात” वाला और “बहनजी के पैरों की धूल के बराबर भी नहीं” बताते हुए कहा, “हम जैसे लाखों युवा बहनजी के लिए कुर्बान हो जाएंगे, लेकिन उन पर खरोंच भी नहीं आने देंगे।”
यह बयान X (पूर्व ट्विटर) पर खूब शेयर हुआ, जहां #UditRaj और #Mayawati जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। गौतम ने यह भी जोड़ा कि उदित राज जैसे “दलबदलू” नेता स्वार्थ के लिए दल बदलते रहते हैं और अब कांग्रेस के इशारे पर BSP को निशाना बना रहे हैं।
पृष्ठभूमि और राजनीतिक संदर्भ
यह विवाद कोई नया नहीं है। उदित राज पहले भी मायावती पर “गला घोंटने” जैसे विवादित बयान दे चुके हैं (फरवरी 2025 में), जिस पर आकाश आनंद (मायावती के भतीजे) ने 24 घंटे में गिरफ्तारी की मांग की थी। रामजी गौतम ने तब भी उदित राज को “कभी BJP तो कभी कांग्रेसी चमचा” कहा था। वर्तमान विवाद UP विधानसभा चुनावों से पहले दलित वोट बैंक को प्रभावित करने वाला माना जा रहा है, जहां BSP को BJP और कांग्रेस दोनों से चुनौती है।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं
X पर यह मुद्दा गरमाया हुआ है:
कई यूजर्स उदित राज को “दलितों का दुश्मन” बता रहे हैं, जबकि कुछ ने BSP से अपील की कि खटीक समाज के वोट न खराब हों।
एक पोस्ट में लिखा गया: “उदित राज का आत्मसम्मान मर गया है, ये बाबासाहेब का नाम लेकर दलितों को गुमराह करता है।”
यह विवाद दलित राजनीति में एकता vs विभाजन की बहस को तेज कर रहा है। BSP ने अभी आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन गौतम जैसे नेताओं के बयानों से साफ है कि पार्टी इसे “विपक्षी साजिश” बता रही है।

