चरण सिंह राजपूत
मुलायम सिंह यादव को ऐसे ही नेताजी नहीं कहा जाता है। एक गरीब परिवार में पैदा हुए मुलायम सिंह यादव का न तो नाक नक्शा कोई खास था और न ही वह कोई बहुत अच्छे वक्ता था और न ही उनको राजनीति विरासत में मिली थी फिर भी उन्होंने राजनीतिक बुलंदी को छूआ। वह न केवल तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने बल्कि देश के रक्षामंत्री बनने का भी गौरव उन्होंने प्राप्त किया।
ऐसे में हर किसी के दिमाग में प्रश्न उठेगा कि आखिरकार नेताजी में ऐसा क्या करिश्मा था कि उन्होंने राजनीतिक के क्षेत्र में अपनी क्षमता का लोहा मनवाया। दरअसल नेताजी के कार्यकर्ताओं से आत्मीयता के संबंध थे। एक समय था जब नेताजी लैंडलाइन फोन से किसी भी कार्यकर्ता को फोन लगा थे और संगठन के बारे में न केवल पूछते थे बल्कि काम करने लिए प्रोत्साहन भी देते थे। वह नेताजी ही थे जिन्होंने साइकिल से घूम-घूम कर संगठन को मजूबत किया था। वह माद्दा नेताजी में ही था कि जिसे अपना मान लिया उसके साथ हर स्तर से रहे। उत्तर प्रदेश में जब राजा भैया पर माायावती ने पोटा लगाया था तो वह नेताजी ही थे जो खुलकर राजा भैया के साथ खड़े हो गये थे। यही वजह रही कि भले भी अखिलेश यादव से राजा भैया के कितने भी मतभेद हों पर नेताजी की हालत गंभीर होने पर राजा भैया उनकी खबर लेने के लिए गुरुगांव मेदांता अस्पताल पहुंचे थे। डॉ. राम मनोहर लोहिया को अपना आदर्श और चौधरी चरण सिंह को अपना रानजीतिक गुरु मानने वाले नेताजी ने किसानों के लिए अलग हटकर काम किया।
मैं भले ही पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं मैं भी नेताजी का सक्रिय कायर्कर्ता रहा हूं। बात उन दिनों की है जब उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार से भाजपा ने समर्थन वापस ले लिया था और २००३ में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी थी। उस समय मैं समाजवादी पार्टी के विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेता रहता था। २००५ में जब मैंने अपनी बहन की शादी की तो शादी के कार्ड नेताजी और अमर सिंह समेत पार्टी के लगभग सभी नेताओं को भेजे थे। वह नेताजी ही थे जिन्होंने मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए भी शादी की शुभकामनाओं का पत्र मेरे गृह जनपद बिजनौर के डीएम को भेजा था। डीएम कार्यालय से एक सरकारी कर्मचारी नेताजी की वह शुभकामना पत्र लेकर मेरे गांव पहुंचा था। वह नेताजी के आत्मीयता के संबंध ही रहे हंै कि आज अखिलेश यादव का व्यवहार कार्यकर्ताओं के प्रति नेताजी जैसा न होने के बावजूद कार्यकर्ता सपा से जुड़े हैं और आज नेताजी के निधन पर गमजदा हैं।