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बिहार चुनाव जीतने के लिए बीजेपी ने ढूंढा लोहिया के नाम का सहारा!

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा – 100 में साठ हमारा बाकि में बंटवारा 

चरण सिंह 
नई दिल्ली/पटना। बिहार चुनाव जीतने के लिए बीजेपी समाजवाद का सहारा ढूंढ रही है। समाजवाद के प्रणेता डॉ. राम मनोहर लोहिया के नारे संसोपा ने बांधी गांठ पिछड़ा पावे सौ में साठ की तर्ज पर उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से कहलवाया गया है। 100 में साठ हमारा बाकि में बंटवारा। मतलब बीजेपी इस बार बिहार चुनाव में पिछड़ा पर दांव खेलने जा रही है। सामजवाद के प्रणेता डॉ. राम मनोहर लोहिया के नाम का सहारा ढूंढ रही है। पिछड़े नेताओं को आगे कर रही है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रतिपक्ष नेता तेजस्वी यादव के सामने सम्राट चौधरी को बढ़ावा दिया जा रहा है।
दरअसल बिहार की राजनीति समाजवाद पर निर्भर रही है। चाहे कर्पूरी ठाकुर हों, लालू प्रसाद हों या फिर नीतीश कुमार इन सभी नेताओं ने पिछड़ों के दम पर राज किया है। नीतीश कुमार यदि 20 साल से बिहार के मुख्यमंत्री हैं तो वह पिछड़ों का ही समर्थन है। इस बार बिहार में महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा तेजस्वी यादव हैं तो सत्तापक्ष की ओर से नीतीश के चेहरे पर चुनाव लड़ा जा रहा है। वह बात दूसरी है कि मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं घोषित किया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का स्वास्थ्य ख़राब चल रहा है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि बीजेपी अपना मुख्यमंत्री बनाना चाहती है।
केशव प्रसाद मौर्य के इस बयान के बाद प्रश्न यह भी उठता है कि जो केशव प्रसाद मौर्य बीजेपी की मोदी लहर में भी अपनी सीट न जीत सके। जो केशव मौर्य उत्तर प्रदेश के नेता हैं, उनकी बात का बिहार के लोगों पर कितना असर पड़ेगा ? वह भी लालू प्रसाद जैसे खांटी समाजवादी नेता के होते हुए और फॉर्म में चल रहे तेजस्वी यादव के सामने। एनडीए में नीतीश कुमार के रहते हुए। हिंदुत्व के दम पर राजनीति करने वाली बीजेपी को समाजवाद के नाम पर कितना वोट मिलेगा ?
दरअसल बीजेपी की समझ में नहीं आ रहा है कि आखिरकार बिहार के चुनाव जीता कैसे जाए। कभी बिहार में आरएसएस को  लगाया जाता है तो कभी बागेश्वर को। कभी प्रधानमंत्री मोदी अपनी मां को दी गया गाली को मुद्दा बनाते हैं तो अब लोहिया के नाम का सहारा।
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