मोदी जी की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर कहा था कि कोविड के टीके से किसी को कुछ हुआ है तो इसके लिए सरकार नहीं वह व्यक्ति खुद जिम्मेदार है। आप सब को भली-भांति याद होगा कि कोरोना के समय कोविड का इंजेक्शन के लिए सरकार ने क्या क्या कहा था, क्या क्या किया था। बिना इंजेक्शन सर्टिफिकेट के हवाई जहाज में आप नहीं चढ़ सकते थे। रेलवे का टिकट लेते समय सर्टिफिकेट दिखलाना जरूरी था। अस्पतालों में बिना सर्टिफिकेट के भर्ती नहीं लिया जाता था। यहां तक की कोरोना जांच रिपोर्ट के बगैर अस्पतालों या सार्वजनिक स्थानों पर प्रवेश की मनाही थी। यह सब किसके आदेश पर था आप सब को अच्छी तरह याद होगा।
लेकिन कोविड इंजेक्शन के साइड इफेक्ट सामने आने पर हलफनामा दाखिल कर कहा गया कि इंजेक्शन लेना अनिवार्य नहीं बल्कि स्वेच्छिक था। युद्ध का मामला हो या महामारी का सरकार यही कहती है कि जो उचित लगे वही करो। इसे क्या कहा जाएगा?






