कहीं एक दिन दुनिया को ही खत्म न कर दे हथियारों की यह होड़!

कहीं एक दिन दुनिया को ही खत्म न कर दे हथियारों की यह होड़!

हथियारों की होड़ पर लगे अंकुश, अहिंसा और शांति के लिए हो प्रयास

दुनिया में मौजूद हैं 12000 से ज्यादा परमाणु हथियार

100 परमाणु बम ही पर्याप्त हैं दुनिया को खत्म करने के लिए

खतरनाक मोड़ पर पहुंची ईरान इजरायल की जंग

हिरोशिमा नागाशाकी पर गिराए गए परमाणु बस से 3000 गुना शक्तिशाली हैं आज के हाइड्रोजन बम

चरण सिंह 
समाजवाद के प्रणेता डॉ. राम मनोहर लोहिया हथियारों की होड़ के विरोधी थे। उनका कहना था कि हथियारों की होड़ पर अंकुश लगना चाहिए। दुनिया ने उस समय डॉ. लोहिया की बात नहीं सुनी और हथियारों की होड़ बढ़ती ही गई। किसी समय महात्मा बुद्ध, महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद और स्वामी दयानंद जैसे महापुरुषों दुनिया में अहिंसा और शांति के लिए प्रयास किये थे। साधु संत तो आज भी बहुत हैं पर ये साधु संत सत्ता और पॉवर के पीछे भाग रहे हैं। आज स्थिति यह हो गई है कि और दूसरे हथियार तो छोड़िये दुनिया में परमाणु बमों की भरमार हो गई है। अकेले रूस के पास ही इतने परमाणु बम हैं जो दुनिया को खत्म करने के लिए पर्याप्त हैं।
हथियारों की होड़ के दुष्परिणाम सामने आने शुरू हो गए हैं। परमाणु बम के इस्तेमाल होने की आशंका होने लगी है। इजरायल और ईरान युद्ध में बड़े स्तर पर जान और माल की हानि हुई है। भले ही इस समाय सीज फायर चल रहा हो पर मामला शांत होने के बजाय और गंभीर होता जा रहा है। अमेरिका का कहना है कि वह आतंकियों के इस्तेमाल की करने की आशंका के चलते यूरिनियम को अपने कब्जे में लेने का प्रयास कर रहा है। एक समय था कि अहिंसा और शांति के लिए दुनिया भर में तमाम समाज सुधारक प्रयासरत थे। आज की तारीख में हर किसी को राजनीतिक सत्ता की हनक चाहिए। शांति अहिंसा की बात कोई नहीं करेगा। खुद मोदी सरकार के प्रयास भी शांति स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं माने जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार आज की तारीख में दुनिया में
 समझ सकते हैं कि ये बम किसी समय दुनिया के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकते हैं। इन बमों के इस्तेमाल से मानव तो दुनिया पर रहेगा ही नहीं साथ ही पृथ्वी का भी कहीं अता पता नहीं रहेगा। परमाणु युद्ध का सबसे खतरनाक परिणाम सिर्फ धमाके नहीं बल्कि उसके बाद की स्थिति है। परमाणु बम के इस्तेमाल के बाद जो धुंआ छाएगा वह बादल को सालों तक सूरज की रोशनी को रोक सकता है।  इससे पृथ्वी का तापमान तेजी से गिर जाएगा और दुनिया भर की कृषि व्यवस्था ठप हो जाएगी।
देखने की बात यह है कि आज के हाइड्रोजन बम पहले के परमाणु बमों की तुलना में काफी ज्यादा शक्तिशाली हैं। इनमें से कुछ बम तो हिरोशिमा पर गिराए गए बम से 3000 गुना ज्यादा शक्तिशाली हैं। परमाणु हथियारों का मौजूदा वैश्विक जखीरा इंसानी सभ्यता को एक बार नहीं बल्कि कई बार खत्म करने की क्षमता रखता है. यह इस बात को उजागर करता है कि इसमें कितना बड़ा जोखिम शामिल है।
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