नियम क्या है?Department of Telecommunications (DoT) ने 28 नवंबर 2025 को Telecom Cyber Security Rules, 2024 के तहत निर्देश जारी किए।
हर OTT मैसेजिंग ऐप (WhatsApp, Telegram, Signal, Snapchat आदि) को यूजर के रजिस्टर्ड नंबर के एक्टिव SIM कार्ड से लिंक (bind) करना अनिवार्य है।
ऐप तभी चलेगा जब वही SIM फोन में लगा हो और एक्टिव हो।
SIM निकाल दें, डैमेज हो जाए या नंबर निष्क्रिय हो जाए → ऐप बंद हो जाएगा या काम नहीं करेगा।
WhatsApp Web / Desktop / Laptop पर हर 6 घंटे में ऑटो लॉगआउट हो जाएगा। दोबारा लॉगिन के लिए प्राइमरी फोन (जिसमें SIM लगा हो) से QR स्कैन करना पड़ेगा।
डेडलाइन: कंपनियों को 28 फरवरी 2026 तक कंप्लायंस करना है। 1 मार्च से नियम पूरी तरह लागू। सरकार ने कोई एक्सटेंशन या छूट देने से साफ मना कर दिया है।
कौन-कौन से यूजर्स प्रभावित होंगे? (ये यूजर्स)
ये लोग WhatsApp/Telegram इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे या बार-बार समस्या आएगी:
पुराने फोन, टैबलेट या सेकंडरी डिवाइस पर Wi-Fi से सिर्फ चलाने वाले (SIM नहीं लगी हो)।
SIM बदलने वाले लेकिन नया SIM डालकर WhatsApp/Telegram में दोबारा verify नहीं किए।
मल्टी-डिवाइस यूजर्स (Linked Devices) — पहले 14 दिन तक बिना SIM चला था, अब बार-बार re-verify करना पड़ेगा।
eSIM या वर्चुअल नंबर वाले (अगर सही तरीके से bind न हुआ)।
छोटे व्यापारी/बिजनेस जो एक नंबर कई फोनों पर चलाते हैं (60-80% प्रभावित होने की आशंका)।
जिन्हें कोई दिक्कत नहीं: जिनके पास वही SIM प्राइमरी फोन में लगा हुआ है जिससे अकाउंट बना था — बस ऐप अपडेट रखें।
सरकार क्यों ला रही है ये नियम?
साइबर फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, फेक प्रोफाइल, वर्चुअल नंबर से स्कैम रोकने के लिए।
अब अपराधी आसानी से फेक अकाउंट नहीं चला पाएंगे। पुलिस को ट्रेस करना आसान होगा।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का बयान: “सुरक्षा पहले है” — कोई बदलाव नहीं होगा।
यूजर्स को क्या करना चाहिए?
अपने रजिस्टर्ड SIM को प्राइमरी फोन में लगा रखें।
WhatsApp/Telegram को लेटेस्ट वर्जन पर अपडेट रखें (WhatsApp बीटा में SIM binding फीचर टेस्ट कर रहा है)।
अगर SIM बदलनी है तो नया SIM डालकर अकाउंट री-वेरिफाई करें।
Web/Desktop इस्तेमाल करते हैं तो हर 6 घंटे में फोन से QR स्कैन के लिए तैयार रहें।
ज्यादा डिवाइस पर चलाते हैं तो मुख्य फोन में SIM रखें।








