प्रदेश के 12 जिलों में कोल्ड स्टोरेज ही नहीं

बिहार में हर साल होती है 70 लाख टन से ज्यादा खाद्दान्न बर्बादी

राम नरेश

पटना। बिहार कहने को तो गरीब राज्य है लेकिन यहां हर साल इतना अनाज, फल और सब्जियां बर्बाद होती हैं कि केरल की आबादी की एक साल की खाने की जरूरत पूरी हो सकती है।

जिस राज्य को देश के पिछड़े और गरीब राज्यों में गिना जाता है । उस राज्य में खाद्यान्न बर्बादी के आंकड़े बेहद ही चौंकाने वाले हैं। अनुमान के मुताबिक में बिहार में हर साल 70 लाख टन से ज्यादा खाद्दान्न यूं ही बर्बाद हो जाता है। इतने अनाज में छोटे-मोटे राज्य की साल भर की खाने की जरूरत पूरी हो सकती है।

बिहार खाद्यान्न के पैदावार में अव्वल है लेकिन खाद्यान्न का एक बड़ा हिस्सा बर्बाद हो जाता है। आंकड़ों के मुताबिक बिहार में हर साल 200 लाख टन अनाज की पैदावार होती है। इतने उत्पादन के बावजूद बिहार के किसान खुशहाल नहीं है.वजह यह है कि लाखों मीट्रिक टन फसल किसानों के बर्बाद हो जाते हैं। बिहार में लगभग 70 लाख टन फल सब्जी और अनाज गोदाम की उपलब्धता के अभाव में बर्बाद हो जाते हैं।

आंकड़ों के मुताबिक बिहार में 11.2 लाख टन आम हर साल बर्बाद होते हैं। इसके अलावा 3.2 लाख टन केला, 3.4 लाख टन अमरूद, 28.3 लाख टन आलू, 5.5 टन प्याज, 5.5 लाख टन टमाटर, 3.2 लाख टन पत्ता गोभी और 4.5 लाख टन फूलगोभी हर साल बर्बाद होते हैं। इसके अलावा 1.5 लाख टन गेहूं और 2 लाख टन चावल की बर्बादी होती है। सब्जी बर्बादी के मामले में बिहार पूरे देश में पांचवें नंबर पर है तो फल बर्बादी में चौथे स्थान पर है।

बिहार में 200 लाख टन अनाज की पैदावार होती है और 163 लाख टन सब्जी की पैदावार है। फल की अगर बात कर ले तो बिहार में 52 लाख टन फल का उत्पादन होता है। सब्जी के उत्पादन में बिहार जहां चौथे स्थान पर है तो फल उत्पादन में आठवें स्थान पर है।

बिहार में खाद्यान्न की बर्बादी की सबसे बड़ा कारण है स्टोरेज की क्षमता में कमी। स्टोरेज के मामले में भी बिहार की स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बिहार के 12 जिले ऐसे हैं जहां कोल्ड स्टोरेज ही नहीं हैं। बिहार जैसे राज्य की कोल्ड स्टोरेज क्षमता जहां सिर्फ 22.51 लाख मीट्रिक टन है वहीं पंजाब की स्टोरेज क्षमता 233.99 लाख मीट्रिक टन है।

बिहार सरकार ने राज्य के हर प्रखंड में कोल्ड स्टोरेज खोलने की योजना बनाई थी और इसको लेकर कैबिनेट ने स्वीकृति भी दे रखी है। जिसके मुताबिक हर प्रखंड में 2000 मीट्रिक टन की क्षमता वाले गोदाम का निर्माण किया जाना है, लेकिन अब तक योजना अधूरी पड़ी है।
नेशनल हेल्थ सर्वे की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 19 करोड़ लोग भूखे सोते हैं, जबकि देश में 40% खाद्यान्न बर्बाद हो जाते हैं.खाद्यान्न बर्बाद होने के मामले में भारत दूसरे स्थान पर है और हर साल करीब 92 हजार करोड़ रुपये के खाद्यान्न बर्बाद होते हैं।

एनएसएस के आंकड़ों के अनुसार अनुमानित प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष अनाज-फल-सब्जी का उपभोग 180 किलोग्राम के आसपास है। जबकि बिहार में लगभग 70 लाख टन खाद्यान्न बर्बाद हो रहा है. ऐसे में बिहार में अनाज, फल और सब्जियों की बर्बादी पर गौर करें तो समझ में आएगा कि यहां साल भर में जितना बर्बाद होता है उससे केरल की 3.50 करोड़ की आबादी की साल भर के खाने की जरूरत पूरी हो सकती है।

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