किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूरन सिंह विरोध में तो भीम आर्म के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद उतरे पक्ष में
चंद्रशेखर आज़ाद 11 फरवरी को दिल्ली जंतर-मंतर पर गरजे तो पूरन सिंह 7 मार्च से निकाल रहे परिवर्तन यात्रा
चरण सिंह
नई दिल्ली। फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट ने भले ही यूजीसी एक्ट पर रोक लगा दी हो पर जिस तरह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ठाकुर पूरन सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। उससे जातीय संघर्ष की आशंका हो गई है। दरअसल ठाकुर पूरन सिंह का किसान मजदूर संगठन यूजीसी एक्ट के विरोध में तो चंद्रशेखर आज़ाद की भीम आर्मी पक्ष में सड़कों पर उतर आया है उससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जातीय टकराव की आशंका बढ़ गई है।

दरअसल जब यूजीसी एक्ट के खिलाफ सवर्ण समाज सड़कों पर उतरा तो नगीना से सांसद और भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद ने आगरा में आयोजित एक कार्यक्रम में एलान किया कि यदि मुठ्ठी भर लोगों के दबाव में यूजीसी एक्ट रोका गया तो वह आंदोलन करेंगे। चंद्रशेखर आज़ाद के बयान के बाद किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूरन सिंह ने कहा कि यदि वे यूजीसी एक्ट के पक्ष में आंदोलन करेंगे तो वे लोग उनके खिलाफ आंदोलन करेंगे।
11 फरवरी को चंद्रशेखर ने अपनी ताकत दिल्ली जंतर मंतर पर दिखाई तो पूरन सिंह 7 मार्च से परिवर्तन यात्रा निकाल रहे हैं। यह यात्रा गांव गांव होते हुए 19 मार्च को दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय पहुंचेगी। दरअसल पूरन सिंह ने केंद्र सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ पूरी तरह से मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने धौलाना के एक कार्यक्रम में कहा कि सहारनपुर, धौलाना और अलीगढ 7 मार्च से शुरू होकर गांव गांव होते हुए 19 मार्च को दिल्ली के बीजेपी मुख्यालय पर प्रदर्शन करेंगे।
अक्सर देखा गया है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से दिल्ली के लिए जो भी यात्रा निकाली गई उसका देश की राजधानी पर बड़ा असर हुआ है। इस यात्रा के दिल्ली बॉर्डर पर रोकने की संभावना ज्यादा है। माना जा रहा है कि यह यात्रा भी अपना असर देश की राजनीति पर डालेगी। इस यात्रा की विशेषता यह है कि दूसरी यात्रा दिल्ली जंतर मंतर पहुंचती रही हैं पर यह यात्रा बीजेपी मुख्यालय को घेरने के लिए निकाली जा रही है।
यह यात्रा गांव गांव होते हुए जाएगी तो आशंका इस बात की है कि कहीं सहारनपुर की तरह दलित राजपूत संघर्ष को हवा न मिल जाए। क्योंकि सहारनपुर में भी महाराणा प्रताप जयंती पर राजपूतों ने यात्रा निकाली थी जिसको लेकर दलित और राजपूतों में संघर्ष हुआ था। उसके बाद कई दलितों की झौंपड़ी फूंक दी गई थी।






