चरण सिंह
आज उस समय सहारा की पुरानी यादें ताजा हो गई जब दिवाली पूजन के समय चांदी का सिक्का तलाशा गया। चांदी के सिक्कों में सहारा शहर में दुनिया भर में चर्चित रही सुब्रत राय के दोनों बेटों सुशांतो राय और सीमांतो राय की शादी में मिला चांदी का सिक्का भी दिखाई दिया। आज जब देश में दिवाली मनाई जा रही है ऐसे में सहारा से जुड़े लाखों कर्मचारी और अभिकर्ता ऐसे भी हैं जिनके बच्चे पैसे के अभाव में दिवाली नहीं मना पा रहे होंगे। यह सिक्का सहारा से जुड़े उन सभी साथियों को चिढ़ा रहा है जो वेतन न मिलने या बकाया भुगतान न मिलने पर दिवाली नहीं मना पा रहे हैं।
यह सिक्का देखकर मुझे सहारा शहर में हुई इस भव्य शादी समारोह याद आ गया जिसमें में मैं भी गया था। देश भर की सभी पार्टियों के बड़े नेता, बॉलीवुड और खेल क्षेत्र की हस्तियां, ब्यूरोक्रेट्स इस शादी समारोह में पहुंचे थे। यहां तक कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी खुद इस शादी समारोह में पहुंचे थे।
पानी की तरह पैसा बहाया गया था। 2004 में हुए इस शादी समारोह में सबसे अधिक चर्चा अमर सिंह और अमिताभ बच्चन की हुई थी।।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे और 2003 में जब मायावती सरकार से बीजेपी ने समर्थन वापस लिया तो मुलायम सरकार बनाने में अमर सिंह और सुब्रत राय का बड़ा योगदान रहा था। क्योंकि बसपा के विधायक तोड़े गए थे। विधायकों की खरीद फरोख्त हुई थी। कहा तो यह भी जाता है कि मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहन समारोह का सारा खर्चा सहारा ने उठाया था। सहारा शहर में ही शपथ ग्रहण का जश्न मनाया गया था।
यह सब मैं इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि जिस सहारा शहर में वह शादी हुई थी वह आज सील है। सुब्रत राय, मुलायम सिंह, अमर सिंह परलोक सिधार चुके हैं।
सुशांतो राय और सीमांतो राय पर जेल जाने का संकट गहराया हुआ है। जो अभिकर्ता सुब्रत राय के पैर छूने के लिए लंबी कतार में लगे थे वे अपने भुगतान के लिए दर दर की ठोकरें खा रहे हैं। जिन कर्मचारियों को सहारा शहर बुलाकर तरह तरह के सपने दिखाए गए थे वे बकाया भुगतान के लिए आंदोलन पर हैं। जिस मीडिया के दम पर सुब्रत राय गलत को सही कराता था। उस मीडिया नोएडा का ऑफिस सील है। मीडिया के साथी आंदोलन पर हैं।
जिस सहारा का देश में रुतबा था। जिस ग्रुप का चेयरमैन सुब्रत राय नेताओं, ब्यूरोक्रेट्स, खिलाड़ियों, अभिनेताओं पर जमकर पैसा लुटाते था। वह सहारा अब अडानी खरीदने को बेताब है। यह भी कह सकते हैं कि सहारा प्रबंधन अडानी को बेचने को मजबूर है। सहारा प्रबंधन और मालिकांन किसी तरह से अपनी गर्दन बचाने में लगे हैं।
आज सहारा ले कर्मचारियों, निवेशकों की दर दर ठोकरें खाने और प्रबंधन की गर्दन फंसने का बड़ा कारण यह है कि सुब्रत राय की नीयत कभी लेकर देने की न रही होना है। सुब्रत राय को स्वाभिमान और खुद्दार आदमी पसंद न था। चापलूस और चाटुकार लोग उसके इर्द गिर्द रहते थे। इन चाटुकारों ने दोनों हाथों से सहारा को लुटा पर सुब्रत राय अपनी अय्याशी में मस्त रहा। दोनों बेटों ने भी कर्मचारियों और निवेशकों की कोई सुध न रही। विदेश में जाकर बस गए। सुब्रत राय का भाई जेबी राय और दोस्त ओपी श्रीवास्तव भी सहारा को लूटते रहे।
मक्कार सहारा प्रबंधन संकट के समय भी कर्मचारियों और निवेशकों का पैसा देने के बजाय चोरी छिपे सहारा की संपत्ति बेचने में लगा था। यह बात समझने की है कि ईडी का शिकंजा भी कर्मचारियों और निवेशकों के लिए नहीं है बल्कि सहारा की संपत्ति हथियाने के लिए है। गृहमंत्री अमित शाह सहारा पर शिकंजा कसकर सहारा की प्रॉपर्टी अडानी को दिलाने में लगे हैं। कर्मचारियों और निवेशकों ने हिम्मत और एकजुटता दिखाई तो पैसा मिल जाएगा नहीं तो अडानी का दिया पैसा भी सरकार डकार जाएगी।
कहां हैं वे नेता, अभिनेता, खिलाड़ी और ब्यूरोक्रेट्स जिन्होंने सहारा के संसाधनों का फायदा लिया है ? कहां हैं सहारा के वे अधिकारी जिन्होंने दोनों हाथों से सहारा को लुटा है।
सहारा प्रबंधन और सहारा को लूटकर प्रॉपर्टी अर्जित करने वाले लोगों समझ लीजिए। निवेशकों और कर्मचारियों का भुगतान पांच लाख करोड़ से भी अधिक है। इतनी आसानी से नहीं छोड़ेंगे। सहारा की संपत्ति यदि कम पड़ेगी तो सहारा को लूटकर बनाई गई संपत्ति की जांच कराई जाएगी। सहारा में हेकड़ी दिखाने वाले अधिकारी भी नहीं बख्शें जाएंगे।







