बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान (खालिदा जिया के पति) की हत्या 30 मई 1981 को चटगांव में एक सैन्य विद्रोह के दौरान हुई थी। उनकी मृत्यु के बाद की घटनाएं इस प्रकार हैं:
हत्या के तुरंत बाद, विद्रोहियों ने उनका शव चटगांव सर्किट हाउस से ले जाकर चटगांव के रांगुनिया इलाके में एक पहाड़ी क्षेत्र में गुप्त रूप से दफनाया गया। यह दफन जल्दबाजी में और गोपनीय तरीके से किया गया।
अगले दिन (1 जून 1981 को), शव को उस कब्र से निकाला गया (एक्सह्यूम किया गया), हेलीकॉप्टर से ढाका लाया गया। ढाका में संसद भवन के पास विशाल जनाजे के बाद उन्हें चंद्रिमा उद्यान (अब जिया उद्यान) में पुनः दफनाया गया। यह जगह संसद भवन के करीब है और बाद में यहां उनका मकबरा बनाया गया।
यह पुनर्दफन इसलिए किया गया क्योंकि शुरुआती दफन विद्रोहियों द्वारा किया गया था, और नए नेतृत्व (उस समय उपराष्ट्रपति अब्दुस सत्तार कार्यवाहक बने) ने राजकीय सम्मान के साथ ढाका में दफनाने का फैसला लिया। लाखों लोग जनाजे में शामिल हुए। यह घटना बांग्लादेश के इतिहास में राजनीतिक अस्थिरता का हिस्सा है, और जियाउर रहमान की कब्र बाद में विवादों का विषय भी बनी (जैसे स्थानांतरण की मांगें), लेकिन उनका शव वहीं रहा। हाल ही में (31 दिसंबर 2025 को) खालिदा जिया का निधन होने पर उन्हें इसी मकबरे में उनके पति की कब्र के पास दफनाया गया।







