हंगामा खड़ा करना ही मकसद

दीपक राजा

संसद के मॉनसूत्र सत्र की शुरुआत ही विपक्ष के नारेबाजी और हंगामे से हुई. ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा कराने की मांग को लेकर विपक्ष के हंगामे के चलते पहले दिन दोनों सदनों में कोई काम नहीं हुआ. ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के लिए समय तय हुआ तो विपक्ष बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर चर्चा कराने की मांग करते हुए हंगामा करने लगे. सत्ता पक्ष की ओर से कहा गया कि चुनाव आयोग संवैधानिक संस्था है और SIR का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है. उस पर 28 जुलाई को सुनवाई होनी है. ऐसे में अभी इस पर चर्चा का कोई औचित्य नहीं है. अब SIR के नाम पर चार दिनों से संसद की कार्यवाही को विपक्ष द्वारा बाधित किया गया.

मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मीडिया में सामान्य अधिक लंबा वक्तव्य दिया. उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर से लेकर अर्थव्यवस्था तक, सामाजिक सुरक्षा से लेकर तमाम मुद्दों की बात की. उन्होंने विपक्ष से हर मुद्दे पर सार्थक बहस के साथ मानसून सत्र को सुचारू रूप से संचालन करने का आह्वान भी किया लेकिन पिछले पांच दिनों से सदन के भीतर नारेबाजी और हंगामा और कार्यवाही में व्यवधान ही दिख रहा है. सत्र शुरू होने से पहले विपक्ष ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा कराने के लिए विशेष सत्र की मांग कर रहा था. सत्र शुरू हुआ और ऑपरेशन सिंदूर के लिए समय भी निर्धारित हो गया. फिर भी सदन के भीतर हंगामा और नारेबाजी रूक नहीं रहा है. मॉनसून सत्र का लगातार पांचवां दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया. विपक्ष का व्यवहार गैर जिम्मेदाराना है.

विपक्ष चाहे ऑपरेशन सिंदूर को लेकर जितना हंगामा कर ले, सदन में नियत समय पर जब इस पर चर्चा शुरू होगी और सरकार जवाब देना शुरू करेगी, विपक्ष का प्रोपेगंडा ध्वस्त हो जाएगा. फिर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और उनके साथ पूरा इंडि ब्लॉक सदन से वॉकआउट कर जाएगा. यही विपक्ष की परिपाटी रही है, आरोप लगाओ और जवाब सुने बिना भाग जाओ. चाहे राफेल हो, पेगासस जासूसी का मसला हो या मणिपुर हिंसा पर चर्चा, हर बार चर्चा कराने के नाम पर सदन में विपक्ष ने हंगामा किया. सरकार जवाब देना शुरू करती है तो सुने बिना, नेता प्रतिपक्ष और घटक दलों के नेता सदन से बहिर्गमन कर जाते हैं.

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