नोएडा (ग्रेटर नोएडा) सेक्टर-150 में हुए उस दर्दनाक हादसे से जुड़ा है, जिसमें 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई। यह घटना जनवरी 2026 में हुई, जब उनकी कार घने कोहरे में एक पानी से भरे गहरे गड्ढे (निर्माणाधीन बेसमेंट/पिट) में गिर गई।
समाचारों के अनुसार गड्ढा और पानी का मुद्दा: यह गड्ढा (लगभग 20-30 फीट गहरा) निर्माण साइट पर था, जो वर्षों से खुला पड़ा था। बारिश और नालों का पानी इसमें भरता रहता था, जिससे यह एक छोटे तालाब जैसा बन गया था।
सैटेलाइट इमेज में दिखाई देना: Google Earth जैसी सैटेलाइट तस्वीरों में यह पानी से भरा बड़ा गड्ढा 2021 से ही (यानी करीब 5 साल से) साफ दिख रहा था। कई मीडिया रिपोर्ट्स (जैसे आज तक, टाइम्स नाउ, इंडिया टुडे) में इसकी पुष्टि हुई है कि 2021 से निर्माण गतिविधि के बाद यह गड्ढा पानी से भरा दिख रहा है, लेकिन स्थानीय प्रशासन (नोएडा अथॉरिटी) या अफसरों की नजर इसमें नहीं गई। कोई कार्रवाई नहीं हुई, न बैरिकेडिंग ठीक से की गई, न इसे भरवाया गया।
अफसरों की लापरवाही: हादसे तक अधिकारियों को इस खतरे की जानकारी नहीं लगी या लगी भी तो अनदेखा किया गया। घटना के बाद ही जूनियर इंजीनियर को बर्खास्त किया गया, दो बिल्डर कंपनियों के खिलाफ FIR दर्ज हुई, और जांच शुरू हुई। लेकिन सवाल वही है—5 साल तक सैटेलाइट में दिखते खतरे पर आंखें क्यों बंद रहीं?
यह मामला प्रशासनिक नाकामी, निर्माण साइटों पर सुरक्षा की कमी, और आपातकालीन रेस्क्यू में देरी का बड़ा उदाहरण बन गया है। युवराज ने करीब 1-2 घंटे तक कार की छत पर चढ़कर मदद मांगी, पिता को फोन किया, टॉर्च जलाकर सिग्नल दिए, लेकिन रेस्क्यू टीम (फायर ब्रिगेड, SDRF) के पास उचित उपकरण नहीं थे, ठंडे पानी में उतरने से हिचकिचाहट दिखी, और आखिरकार डूबने से उनकी मौत हो गई।







