ज्ञानेश कुमार के मामले पर भी एकजुट नहीं होने जा रहा विपक्ष!
30 की बैठक में आम आदमी और डीएमके नहीं होंगे शामिल, खुद नहीं जाएंगे अखिलेश- भेजेंगे अपना प्रतिनिधि
2023 में चुनाव आयोग के पक्ष में कानून बनने के वक्त भी था यही रवैया
यदि आज देश गर्त में जा रहा है। सरकार लोकतंत्र को बंधक बनाने की ओर अग्रसर है तो इसके विपक्ष भी कम जिम्मेदार नहीं है। 2014 से सरकार मनमानी कर रही है और विपक्ष है कि उसके अपने अपने स्वार्थ हैं। किसी मुद्दे पर एकजुट नहीं हो पाता। किसी जनहित के मुद्दे पर विपक्ष ने एकजुट होकर कोई बड़ा आंदोलन तो किया ही नहीं। अब जब मुख्य चुनाव आयुक्त की मनमानी को लेकर रितिका चोपड़ा ने इंडियन एक्सप्रेस में खबर प्रकाशित कर दी और विपक्ष के लिए संघर्ष एक रास्ता खोल दिया। ऐसे में भी विपक्ष अलग-थलग दिखाई दिया, जमीनी संघर्ष की जगह बयानबाजी तक सिमटा रहा। कांग्रेस को छोड़ दिया जाए तो एक भी क्षेत्रीय पार्टी चुनाव आयोग के खिलाफ सड़कों पर नहीं उतरी।
एकजुट होकर चुनाव आयोग के खिलाफ बड़ी लड़ाई लड़ने के लिए जब 30 सितम्बर को दिल्ली में बैठक रखी गई तो आम आदमी पार्टी और डीएमके के बैठक में न जाने की जानकारी मिल रही है। सपा के मुखिया की जगह उनका प्रतिनिधि बैठक में पहुंच रहा है। मतलब इस मुद्दे पर भी विपक्ष एकजुट नहीं होने जा रहा है। जब एकजुट नहीं होगा तो फिर कैसे सरकार पर दबाव बनाएगा ? मतलब साफ है। राजनीतिक दल देश और लोकतंत्र से ज्यादा तवज्जो सत्ता को दे रहे हैं। वह देश और समाज के लिए नहीं बल्कि सत्ता के लिए राजनीति दे रहे हैं ।
विपक्ष की बैठक में जब आम आदमी और डीएमके नहीं होंगी। सपा मुखिया अखिलेश यादव खुद नहीं होंगे तो फिर क्या संदेश जाएगा ? विपक्ष क्या निर्णय लेगा ? कितना दबाव सरकार पर बनेगा ? ऐसे में बड़ा प्रश्न उठता है कि जब विपक्ष एकजुट नहीं होगा तो फिर जनता कैसे खड़ी होगी ? देश में बड़ा आंदोलन कैसे होगा ? आंदोलन नहीं होगा तो फिर लोकतंत्र की धज्जियां ओर उड़ेंगी ? जब देश और समाज के लिए विपक्ष एकजुट नहीं होगा तो फिर जनता भला क्यों विपक्षी दलों को वोट देगी ? विपक्ष की एकजुटता नहीं दिखाई देगी तो बीजेपी और सहयोगी दलों को चुनाव में फायदा मिलता रहेगा। कहीं ऐसा न हो कि देश की स्थिति चीन और रूस जैसी हो जाए ? वैसे भी बिहार में आरजेडी, महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और प. बंगाल में टीएमसी को लगभग बीजेपी ने खत्म कर दिया है। अखिलेश यादव को भी बिहार और प. बंगाल विधानसभा चुनाव के तरीके पर थोड़ा ध्यान दे लेना चाहिए।
दरअसल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक की बुधवार को सुबह 11 बजे कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बैठक होने जा रही है। बैठक से पहले ही विपक्ष की एकजुटता को बड़ा झटका लगा है। सूत्रों के अनुसार बैठक में DMK और AAP शामिल नहीं होगी। तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के विजय थलापति को समर्थन देने के बाद डीएमके कांग्रेस से नाराज है। दिल्ली में गठबंधन न करने और पंजाब चुनाव के चलते आम आदमी पार्टी बैठक से दूरी बनाकर चल रही है।
दिलचस्प बात यह है कि यह बैठक टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने रखी है। जो केजरीवाल, एमके स्टालिन और अखिलेश यादव की बहुत करीबी बताई जाती हैं। दिल्ली में होने वाली बैठक में डीएमके, आम आदमी पार्टी और सपा मुखिया का ऐसा रवैया है जैसे कि यह बैठक कोई कांग्रेस के भले के लिए बुलाई गई हो। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव खुद इस बैठक में मौजूद नहीं रहेंगे. प्रतिनिधि शामिल होंगे। अखिलेश की गैरमौजूदगी पर कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष को बताया है कि राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन है. उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता और बाकी सभी वरिष्ठ नेता आ रहे हैं। केजरीवाल और स्टालिन किस्से मिल रहे हैं ? मतलब विपक्ष सरकार को मनमानी करने का पूरा मौका दे रहा है।
इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल होने के लिए टीएमसी की प्रमुख ममता बनर्जी दिल्ली आ रही हैं। बैठक में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की ओर से सांसद सुप्रिया सुले, जितेंद्र आव्हाड और पी. एस. चाको शामिल होंगे। शरद पवार मुंबई से ऑनलाइन इस बैठक में शामिल होंगे। शिवसेना यूबीटी के प्रमुख उद्धव ठाकरे समेत अन्य पार्टी नेता ऑनलाइन बैठक में जुड़ेंगे।

