भाजपा द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम व उसके जवाब

अमिता बुच

भ्रमः भारतीय जनता पार्टी की सरकार राष्ट्रवादी है और देश को मजबूत कर रही है।

वास्तविकता जिस विचारधारा के लोग देश के स्वतंत्रता संग्राम से दूर रहे और जिनकी वजह से महात्मा गांधी, जिनकी वजह से पूरी दुनिया में भारत की ऐसी पहचान है जैसी किसी दूसरे से नहीं, की हत्या हुई वे राष्ट्रवादी कैसे हो सकते हैं। बल्कि गांधी की हत्या के प्रयास तो आजादी मिलने से पहले ही शुरू हो गए थे। यानी कुछ आजादी मिलने से पहले ही आजादी के आंदोलन के सबसे बड़े नेता को मारना चाह रहे थे। ये लाग ऐसा करके किसको मजबूत करना चाह रहे थे? नरेन्द्र मोदी देश की परिसंपत्तियों और प्राकृतिक संसाधनों को निजी कम्पनियों के हाथों बेचते चले जा रहे हैं। भाजपा की हिन्दुत्ववादी राजनीति की प्रतिक्रिया तमिल नाडू में यह हुइ है कि काफी दिनों के बाद स्वतंत्र तमिल नाडू की बात होने लगी है। वैसे भी दक्षिण भारत के लोगों को लग रहा है कि यदि संसद में परिसीमन के बाद उत्तर भारत का दबदबा और बढ़ जाएगा तो यह उसके साथ अन्याय होगा जो देश की अर्थव्यवस्था में अनुपातिक रूप से ज्यादा योगदान करता है। खालिस्तानी नेता अमृतपाल सिंह ने तो यहां तक कह दिया कि यदि हिन्दू धर्म के नाम पर हिन्दू राष्ट्र की बात हो सकती है तो सिक्ख धर्म के आधार पर खालिस्तान की क्यों नहीं? मणिपुर में मैतेई व कुकी ऐसे अलग हो गए जैसे इस देश में कभी हिन्दू-मुसलमान न हुए हों। सरकार किसानों से निपटने के लिए वे तरीके अपनाती है जो दुश्मन के लिए भी इस्तेमाल नहीं किए जाते। इन अंदरूनी मतभेदों से तो देश कमजोर ही हुआ है।

 

भ्रमः अयोध्या में मंदिर बना कर नरेन्द्र मोदी हिन्दू धर्म को बढ़ावा दे रहे हैं।

 

वास्तविकताः यदि कोई धार्मिक व्यक्ति है तो वह मानता है कि ईश्वर एक है और विभिन्न धर्म उसी ईश्वर की उपासना के अलग अलग तरीके हैं। अतः एक धार्मिक ढांचे को ध्वस्त कर उसकी जगह दूसरे धर्म का उपासना स्थल खड़ा करना धर्म का काम कैसे हुआ? यदि बाबरी मस्जिद रहते हुए भव्य राम मंदिर बन जाता तो उसे धर्म का काम कहा जा सकता था। बाबरी मस्जिद को ध्वस्त करना भाजपा को राजनीतिक फायदा पहुंचाने के लिए किया गया। राम मंदिर भी भाजपा को राजनीतिक फायदा पहुंचाने के लिए बना है। अतः यह एक राजनीतिक उद्देश्य को पूरा करने वाला मंदिर है, इसका धर्म से कोई लेना देना नहीं है। धर्म का काम होता है इंसान की सेवा करना, जैसे गुरुद्वारों में बिना किसी की जाति या धर्म पूछे लंगर खिलाया जाता है। सिखों ने बांग्लादेश में रोहिंग्या लोगों के लिए और यूक्रेन की पोलैंड सीमा पर युद्ध की वजह से पलायन कर रहे लोगों के लिए लंगर लगाए जबकि इन दोनों ही जगह कोई सिख आबादी नहीं है। इसे धर्म का काम कहा जा सकता है।
बाबरी मस्जिद-राम जन्म भूमि विवाद की तरह अब काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मस्जिद व मथुरा में शाही ईदगाह-कृष्ण जन्मभूमि विवाद खड़े किए जा रहे हैं। क्या अब हमारे पास यही काम रह गया है कि हम पता लगाएं कि जहां मस्जिदें खड़ी हैं वहां पहले कोई मंदिर तो नहीं था? इससे जो विवाद खड़ा होगा उससे भाजपा को फायदा पहुंचेगा। इससे आसान तो कोई राजनीति ही नहीं। इसकी तुलना संयुक्त अरब अमीरात से करें, जिसने एक मुस्लिम देश होते हुए, हाल ही में अबु धाबी में एक मंदिर निर्माण करवा कर साम्प्रदायिक सद्भावना का सकारात्मक संदेश दिया है।

 

भ्रमः भाजपा ने रोजगार के अवसर पैदा किए एवं अर्थव्यवस्था को मजबूत किया।

 

वास्तविकताः रोजगार के अवसर व चरित्र दोनों में गिरावट आई है। सरकारी नौकरियों कम हो रही हैं तो निजी क्षेत्र में शोषण बढ़ा है। रोजगार सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा तो खत्म ही हो गई है। नरेन्द्र मोदी ने जोर-शोर से कौशल विकास कार्यक्रम की शुरुआत की लेकिन फिर पकौड़ा तलने को ही रोजगार बता दिया। यदि भारत की अर्थव्यवस्था अच्छी तरह चल रही होती तो 2023 में 1,192 भारतीय अवैध रूप से इंग्लैण्ड क्यों जाते, 5,253 भारतीय वहां शरण क्यों मांगते और करीब एक लाख भारतीय अवैध रूप से अमरीका क्यों जाते? इसमें गुजरात, जिसके विकास माॅडल की तारीफ मोदी को प्रधान मंत्री बनाने के लिए बढ़ा चढ़ा कर की गई, से बड़ी संख्या है जो कई तो रास्ते में ही शहीद हो जाते हैं। हाल ही में युद्धग्रस्त इजराइल में भेजने के लिए तो भारत सरकार खुद ही मजदूरों का चयन कर रही थी और अब पता चल रहा है कि कुछ भारतीय रूस-यूके्रन युद्ध में भी पहुंच गए हैं। कुछ तो लोगों की मजबूरी होगी जो वे अपनी व अपने परिवार की जान तक जोखिम में डाल कर भारत से पलायन कर रहे हैं।

भ्रमः नरेन्द्र मोदी मे विश्व में भारत की धाक जमा दी।
वास्तविकताः हमारा छोटा सा पड़ोसी मालदीव भारत को चेतावनी दे रहा है कि हम अपनी सेना वहां से हटा लें। हमारे सारे पड़ोसी हमसे ज्यादा चीन के करीबी हो गए हैं जिसमें हिन्दू बहुसंख्यक देश नेपाल भी शामिल है। अमेरिका जिसको मोदी अपना मित्र मान रहे थे उसने भारत पर आरोप लगाया है कि भारत अमेरिका के अंदर एक खालिस्तानी समर्थक की हत्या करवाने की साजिश रच रहा था। इससे पहले कनाडा ने भारत पर आरोप लगाया कि भारत सरकार ने एक खालिस्तानी समर्थक की हत्या करवाई। इससे देश की किरकिरी हुई है। नरेन्द्र मोदी, जो नेहरू की आलोचना करते हैं कि उन्होंने चीन के प्रति नर्म रवैया अपनाया था जिससे देश को नुकसान हुआ, ने भी चीन के राष्ट्रपति को भारत न्यौता दिया। इसके तुरंत बाद ही चीन ने काफी वर्षों बाद भारत के 20 सैनिकों को जान से मार डाला और हमारी भूमि के अंदर प्रवेश कर गया। पाकिस्तान को हम दुश्मन मानते हैं और उसके साथ कोई व्यापार नहीं करते किंतु चीन द्वारा हमारी भूमि पर कब्जा करने के बाद भारत का चीन के साथ व्यापार बढ़ गया। चीन के खिलाफ कठोर भूमिका लेने में प्रधान मंत्री असफल रहे। नेहरू ने कम से कम तिब्बतियों को शरण दी, मोदी सरकार ने तो दलाई लामा का साथ देना ही छोड़ दिया। एक समय भारत ने दक्षिण अफ्रिका में रंगभेद नीति का विरोध किया किंतु आज जब इलराइल द्वारा फिलीस्तीन पर हो रहे अत्याचार पर भूमिका लेने की बात आई तो दक्षिण अफ्रिका ने तो अपनी भूमिका निभाई लेकिन भारत ने नहीं। एक समय भारत दुनिया भर के विकासशील देशों की सबसे सशक्त आवाजों में से था, आज वह अमेरिका व पश्चिमी देशों का पिछलग्गू बन कर रह गया है।

 

भ्रमः भाजपा की सरकार में अपराध खत्म हो गया है।

 

वास्तविकताः उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार ने पिछले 7 वर्षों में 190 व्यक्तियों को मुठभेड़ों में मारा। मुख्य मंत्री अपराधियों को ठोक दो नीति के हिमायती हैं। मंच से कहते हैं कि लव जेहाद करने वालों की राम नाम सत्य की यात्रा निकलेगी। सजा देने का काम पुलिस या सरकार का नहीं है। यह काम न्यायालय का है। पुलिस का काम है मुकदमा दर्ज करना और गिरफ्तारी करना। भाजपा सरकारों में बुलडोजर कानून और व्यवस्था का प्रतीक हो गया है। नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में जिन लोगों को जेल भेजा गया उनकी संपत्ति भी कुर्क करने की तैयारी थी। बिना मुकदमा चले, बिना जुर्म साबित हुए भाजपा सरकार दण्डात्मक कार्यवाही करती है। यह कानून और व्यवस्था की जगह अराजकता का शासन है। दूसरी तरफ भाजपा के साथ जो अपराधी हैं उन्हें खुली छूट मिली हुई है। केन्द्रीय मंत्री अजय मिश्र टेनी के उकसावे पर उसके बेटे आशीष मिश्र ने अपनी गाड़ी से कुचल चार किसानों व एक पत्रकार को मार डाला। आशीष मिश्र जमानत पर जेल से बाहर हैं और अजय मिश्र मंत्री बने हुए हैं और फिर चुनाव लड़ने की तैयारी है। बृज भूषण शरण सिंह ने महिला पहलवानों का यौन शोषण किया। उसकी गिरफ्तारी तक नहीं हुई। दबाव में एक नाबालिग पहलवान ने अपनी शिकायत वापस ले ली। निर्लज्जता की हद यह है कि बृज भूषण कुश्ती तंत्र पर अपना शिकंजा कायम रखे हुए हैं। सरकार भी उनको सांसद सदस्य बनाए हुए है। भाजपा सीधे-सीधे अपने अपराधियों को संरक्षण देती है। सिर्फ राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ कार्यवाही करती है।

 

भ्रमः भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार खत्म हो गया है।

 

वास्तविकता : नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री होते हुए जब भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने आते हैं तो अडानी के जहाज से आते हैं। वे चुनाव प्रचार के लिए भी अडानी का जहाज इस्तेमाल करते हैं। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि अर्थव्यवस्था के लगभग सभी क्षेत्रों के बड़े ठेके अडानी को मिल गए हैं। आप कल्पना कीजिए कि कोई बड़ा अधिकारी या मंत्री सरकारी गाड़ी छोड़ किसी पूंजीपति की गाड़ी से चलने लगे तो लोग क्या कहेंगे? नरेन्द्र मोदी ने मुकेश अंबानी के निजी अस्पताल का उद्घाटन किया जिसमें अंबानी का हाथ मोदी की पीठ पर है। क्या कोई आम इंसान किसी अधिकारी की भी पीठ पर हाथ रख सकता है? सरकारी व्यवस्था में किसी ठेकेदार को कोई काम कराना हो तो कम से कम तीन वर्ष का अनुभव जरूरी होता है। अनिल अंबानी को रक्षा क्षेत्र में बिना किसी अनुभव के राफेल जहाज बनाने का ठेका मिल गया। जाहिर है कि मोदी ने अपने चहेते पूंजीपतियों को अनुचित लाभ पहुंचाता है। क्या यह भ्रष्टाचार नहीं है? वैसे जिसे आम तौर पर भ्रष्टाचार कहा जाता है, यानी घूस, उसकी दर भी भाजपा सरकार में बढ़ गई है। अब घूस सरकारी लोग सीधे नहीं ले रहे। इसके लिए बिचौलिए रख लिए गए हैं।

भ्रमः कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद वहां स्थितियां सामान्य हो गई हैं।

वास्तविकताः मनमोहन सिंह के समय में जम्मू व कश्मीर में नागरिकों, सुरक्षा कर्मियों व आतंकवादियों के मरने की संख्या में जो कमी आई थी, नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में ये मौतें उससे ज्यादा हो रही हैं। सबसे बड़ा सवाल है कि धारा 370 हटे साढ़े चार साल हो गए हैं, किंतु सरकार यहां विधान सभा के चुनाव क्यों नहीं करा रही है? इसी से पता चलता है कि स्थितियां सामान्य नहीं हैं। लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग किया गया और बताया गया कि वहां के लोग इससे बहुत खुश हैं। किंतु आज वहां के लोग अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं और आंदोलन करके लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं क्योंकि उनको डर है कि विकास के नाम पर बाहर से कंपनियां आकर वहां प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करेंगी। यदि भारत का कोई और राज्य सिर्फ उपराज्यपाल के जरिए चलाया जाता तो सोचिए वहां के लोग क्या यह स्वीकार करते?

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