कानपुर का ‘महाठग’ रविंद्र नाथ सोनी: कचौड़ी बेचने का बहाना, 22 करोड़ की संपत्ति का मालिक
आजतक की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, कानपुर का रविंद्र नाथ सोनी, जो खुद को साधारण कचौड़ी विक्रेता बताता था और परिवार पालने के लिए आउटलेट चलाने की बात करता था, असल में एक चतुर ठग निकला है। उसका ‘साम्राज्य’ देहरादून, दिल्ली, दुबई और कई अन्य जगहों तक फैला हुआ है, जहां से वह लोगों को ठगता रहा।
पृष्ठभूमि और ठगी का खेल
सोनी लंबे समय से ब्लू-चिप कंपनियों और फर्जी निवेश योजनाओं के नाम पर लोगों को बड़े रिटर्न का लालच देकर ठगता आ रहा था। वह साधारण कपड़े पहनकर और आम आदमी की तरह बात करके शिकारों को फंसाता था, लेकिन उसकी असल जिंदगी आलीशान फ्लैट्स, हाई-प्रोफाइल पार्टियों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों से भरी हुई थी। ठगी का नेटवर्क केरल, कनाडा, दिल्ली, अमेरिका, जापान, दुबई, गुजरात, मुंबई और देश के दर्जनों शहरों तक फैला था। अब तक 700 से ज्यादा पीड़ित सामने आ चुके हैं, और उसके खिलाफ 6 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। कुल ठगी की रकम हजारों करोड़ तक पहुंच सकती है, जिसमें 1500 करोड़ का आंकड़ा भी सामने आया है।
उसके मुख्य साथी:
गुरमीत कौर: अमेरिका में रहने वाली, जो ठगे हुए पैसे को विदेश भेजने में शामिल थी।
सूरज जुमानी: दुबई में सक्रिय, एक ब्लू-चिप कंपनी का डिप्टी डायरेक्टर होने का दावा करता था। उसके खाते में बड़े-बड़े ट्रांजेक्शन पाए गए। जुमानी ने बाद में सरेंडर किया, लेकिन बैंक रिकॉर्ड्स से उसकी संलिप्तता साबित हुई।
शाश्वत सिंह: ठगी के दौरान नोटों की गड्डियां लहराते हुए फोटो में दिखा।
22 करोड़ की संपत्ति: सिर्फ टिप ऑफ द आइसबर्ग
पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने सोनी की 22 करोड़ रुपये की संपत्ति का खुलासा किया है, लेकिन जांचकर्ताओं का मानना है कि वास्तविक मूल्य इससे कई गुना ज्यादा है। मुख्य संपत्तियां:
देहरादून: आलीशान फ्लैट, जहां सोनी की पत्नी और बेटी रहती थीं। यहां से हाई-प्रोफाइल पार्टियों के वीडियो, फोटो और गेस्ट लिस्ट मिली।
दिल्ली: करोल बाग में दुकानें और मालवीय नगर में घर।
एनसीआर: लग्जरी फ्लैट्स।
दुबई: 2 करोड़ रुपये मूल्य का अपार्टमेंट और दो बैंक खातों में करोड़ों रुपये जमा।
सभी संपत्तियों को सील करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
पुलिस की कार्रवाई: फूड ऑर्डर से पकड़ा गया ‘महाठग’
कानपुर पुलिस ने सोनी को हाल ही में गिरफ्तार किया। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वह छिपा हुआ था और भूख लगने पर ऑनलाइन खाना ऑर्डर किया, जिसकी लोकेशन ट्रेस करके पुलिस ने उसे धर दबोचा। गिरफ्तारी के बाद एसआईटी ने उसे रिमांड पर लिया और डिजिटल सबूतों से उसके अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को बेनकाब किया। देहरादून में फ्लैट की तलाशी ली गई, जहां दस्तावेज तो गायब थे, लेकिन आर्थिक ताकत की झलक मिली।








