एनडीआरएफ और एसडीआरएफ तो ग्रेटर नोएडा की तरह नकारा साबित हो सकती थी
चरण सिंह
प्रयागराज में वायु सेना के ट्रेनी विमान के दुर्घटना होने के बाद विमान जिस तरह से तालाब में गिरा और दोनों पायलट को स्थानीय मछुआरों की टीम ने बचाया, ऐसे में मछुआरों को पुरस्कृत और सम्मानित किया जाना चाहिए। यदि SDRF, एनडीआरएफ के भरोसे रहते तो शायद कोई दुखद खबर भी आ सकती थी। शासन और प्रशासन को इस तरह से इंसानियत दिखाने वाले लोगों को पुरस्कृत और सम्मानित करना चाहिए। ग्रेटर नोएडा के युवराज प्रकरण में भी जिस तरह से डिलीवरी ब्वॉय ने पानी घुसकर युवराज को बचाने का प्रयास किया। उसको भी प्रोत्साहन किया जाए। इस डिलीवरी ब्वॉय ने तो निकम्मे सिस्टम का भी पर्दाफाश किया।दरअसल थोड़ी बहुत इंसानियत गरीब और गांव देहात के आदमी में देखी जा रही है। महानगरों में आकर तो लोग संवेदनहीन और स्वार्थी होते जा रहे हैं। या यह कहें कि पैसा आदमी को संवेदनहीन और स्वार्थी बना दे रहा है।
दरअसल यह हादसा उस वक्त हुआ, जब विमान एक नियमित उड़ान पर था। हादसे के दौरान विमान की रिकवरी (पैराशूट) प्रणाली सक्रिय की गई और दोनों पायलट सुरक्षित हैं। वायु सेना ने पोस्ट में कहा, वायु सेना के एक माइक्रोलाइट विमान में, 21 जनवरी को दोपहर सवा बारह बजे प्रयागराज के निकट बमरौली वायु सेना स्टेशन से नियमित उड़ान के दौरान तकनीकी गड़बड़ी आ गई और उसे एक निर्जन इलाके में सुरक्षित रूप से उतारा गया। जानमाल का कोई नुकसान नहीं हुआ। वायु सेना ने भी इन मछुआरों की सराहना नहीं की, जबकि वायुसेना के दो पायलट इन्हीं मछुआरों ने भी बचाए हैं।
वायु सेना ने कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी का दिया आदेश
दूसरी औपचारिकताओं की तरह भारतीय वायु सेना ने इस विमान हादसे को लेकर कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी का आदेश दे दिया गया है। IAF ने कहा-घटना के कारण का पता लगाने के लिए उसने जांच का आदेश दिया है। इस तरह के अत्यंत हल्के (माइक्रोलाइट) विमान का उपयोग आमतौर पर प्रशिक्षण, पक्षी सर्वेक्षण और लैंड सर्वे कार्यों में किया जाता है।








