चरण सिंह
जिस दिन देश में बेरोजगारी, महंगाई और दूसरे जनहित के मुद्दों को लेकर देश में आंदोलन होने लगेंगे उस दिन न कोई सरकार आंदोलन को रोक पाएगी और न ही आंदोलनकारियों का कुछ बिगाड़ पाएगी। सोनम वांगचुक एक गलती कर गए कि उन्होंने अपने एनजीओ के लिए विदेश से पैसा ले लिया। सरकार ने उन्हें उसमें ही उलझा दिया। लगा दिया एनएसए और भेज दिया जेल। हालांकि सोनम का सरकार ज्यादा कुछ बिगाड़ नहीं पाएगी।
उत्तर प्रदेश बरेली में धर्म के नाम पर बवाल किया तो तौकीर रजा और दूसरे लोगों को जेल भेज भेजा गया। बिहार के मुंगेर में कब्रिस्तान को लेकर बवाल हुआ है तो यहां भी बवाल करने वाले जेल जाएंगे। जहां सही नीयत से हक़ की लड़ाई होगी सरकार कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी। उत्तराखंड में छात्र छात्राएं पर्चा लीक करने के विरोध में लड़ाई लड़ रहे हैं। सरकार क्या बिगाड़ पा रही है न इनका ? दरअसल जाति-धर्म के नाम पर होने वाले आंदोलन वोटबैंक के लिए होते हैं। इसलिए इन आंदोलन पर सरकार का डंडा चल जाता है। किसान आंदोलन ने सरकार के घुटने टिकवा दिए थे न ?
बिना किस स्वार्थ के जनहित में जिस दिन देश में आंदोलन होगा। उस दिन सरकार को बैकफुट पर आना ही पड़ेगा। देश में सरकार की मनमानी और विपक्ष के कमजोर पड़ने का बड़ा कारण सत्ता की लालसा है। जिस दिन पुराने समाजवादियों डॉ. लोहिया, लोकनायक जयप्रकाश, कर्पूरी ठाकुर, चंद्रशेखर जैसे खांटी समाजवादियों के उसूलों पर सत्ता की लालसा से ऊपर उठकर देश में आंदोलन खड़ा हो गया उस दिन बदलाव को कोई रोक नहीं पाएगा।
दरअसल सरकार की मनमानी इसलिए चल रही है क्योंकि विपक्ष की नीयत में जनहित कम और सत्ताहित ज्यादा है। आम आंदोलन में भी जनहित कम और स्वहित ज्यादा है। प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी ने वोटर अधिकार यात्रा निकाली। इसमें सत्ता हित ज्यादा रहा। मतलब विपक्ष को इसलिए सत्ता नहीं मिल रही है कि सरकार चुनाव आयोग से चुनाव में गड़बड़ करा रही है। ऐसे ही वोट चोर नारे में जनहित कम और सत्ताहित ज्यादा है। जिस दिन विपक्ष के आंदोलन में सत्ताहित कम और जनहित ज्यादा होगा। उस दिन विपक्ष बदलाव करने की स्थिति में आ जाएगा।
यदि ऐसा नहीं है तो बताया जाए कि विपक्ष ने एकजुटता के साथ जनहित में कितने आंदोलन किये ? कांग्रेस आज की तारीख में दलितों और मुसलमानों की कोली भर रही है। दलितों और मुसलमानों के हक़ में कांग्रेस ने कितने आंदोलन किये ? अखिलेश यादव पीडीए का राग अलाप रहे हैं। अखिलेश यादव बता दें कि पीडीए के हित में समाजवादी पार्टी ने कितने आंदोलन किये ? अखिलेश यादव तो पीडीए के राग में समाजवाद ही भूल गए हैं। ऐसे ही विपक्ष दल हैं जो अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं।
सोनम वांगचुक अपने प्रदेश के लोगों के लिए लड़े। एनएसए लगा जेल गए। सोनम वांगचुक को सरकार ज्यादा नहीं रोक पाएगी। क्योंकि वे लोगों के लिए लड़ रहे हैं। देश और प्रदेश के लिए उन्होंने बहुत कुछ किया है। उधर राजनीतिक दलों के नेता हैं कि उनका हर कदम वोटबैंक को ध्यान में रखते हुए उठता है।
आज़ादी की लड़ाई हो, जेपी आंदोलन हो या फिर कोई बड़ा आंदोलन, सभी आंदोलनों में समाजवादियों ने बड़ा रोल अदा किया है। आज़ादी की लड़ाई में गांधी, नेहरू पटेल के साथ ही लोहिया, जेपी, यूफुस मेहर अली, उषा मेहता जैसे समाजवादियों का भी बड़ा रोल रहा। जेपी आंदोलन में जेपी के साथ मधु लिमए, चंद्रशेखर, चरण सिंह, राजनारायण सिंह, मधु दंडवते, जार्ज फर्नाडीस जैसे तमाम समाजवादियों ने आगे बढ़कर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का विरोध किया और गद्दी से उतार फेंका। क्योंकि ये आंदोलन सही नीयत से हुए थे तो जबरदस्त सफलता मिली। ऐसे ही देश में जिस दिन सच्चे समाजवादियों की तरह आंदोलन खड़ा कर दिया गया। उस दिन देश में बदलाव आ जाएगा।







