सुप्रीम कोर्ट के एससीएसटी आरक्षण को विभाजित करने की अनुमति के विरोध में भीम आर्मी के संस्थापक और नगीना के सांसद चंद्रशेखर आजाद के आह्वान पर दिल्ली में उमड़ी भीड़ बड़ा संदेश दे गई। इंदिरा गांधी स्टेडियम में पहुंची दलितों की भीड़ ने संकेत दे दिया कि आने वाले समय में चंद्रशेखर आजाद अच्छे-अच्छे नेता के लिए खतरा बनने जा रहे हैं, जिस तरह से कभी दलित मायावती के दीवाने थे ठीक उसी तरह से आज की तारीख में चंद्रशेखर आजाद के दीवाने दिखाई दे रहे हैं। मतलब चंद्रशेखर आजाद न केवल मायावती और आकाश आनंद बल्कि अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के लिए भी खतरे की घंटी बन कर उभर रहे हैं।
चंद्रशेखर आजाद ने वह रास्ता अपनाया है जो रास्ता कभी मुलायम सिंह यादव ने अपनाया था। मुलायम सिंह यादव के शुरुआती दिनों के संघर्ष की तरह चंद्रशेखर आजाद हर अन्याय के विरोध में खड़े नजर आते हैं, जबकि मायावती, आकाश आनंद, अखिलेश यादव और जयंत चौधरी वातानुकूलित कमरों में बैठकर बयानबाजी करते हैं। चंद्रशेखर आजाद न केवल हाथरस में हुए हादसे में दिखाई दिए बल्कि एससीएसटी आरक्षण के विभाजन के मामले में २१ अगस्त को सड़कों पर दिखाई दिये। वैसे तो बसपा ने भी आंदोलन को समर्थन किया था पर सड़कों पर लाठी डंडे खाते हुए भीम आर्मी के कार्यकर्ता दिखाई दिये।
दरअसल चंद्रशेखर आजाद की पहचान एक आंदोलनकारी की बन गई है। चाहे किसान आंदोलन हो, पहलवानों का आंदोलन हो या फिर दूसरे आंदोलन हर आंदोलन में चंद्रशेखर आजाद दिखाई दिये हैं। यह चंद्रशेखर आजाद का आंदोलनकारी चेहरा ही था कि आकाश आनंद ने नगीना में उन पर दलित समाज के युवाओं को बरगलाकर आंदोलन में ले जाने पर और उनका भविष्य खराब करने का आरोप लगा दिया। चंद्रशेखर आजाद का प्लस प्वाइंट यह है कि जहां दूसरे नेता आंदोलन से बच रहे हैं वहीं उन्होंने अपनी ताकत आंदोलन को बना रखा है। चंद्रशेखर आजाद का अपने दम पर दिल्ली में जनसैलाब ला देना उनकी दलितों पर पकड़ को दर्शा रहा है। मतलब आज के दलित चंद्रशेखर आजाद को अपना नेता मान रहा है।
देखने की बात यह है कि चंद्रशेखर आजाद की पार्टी आजाद समाज पार्टी उत्तर प्रदेश का उप चुनाव अपने दम पर लड़ रही है। नगीना से भी चंद्रशेखर आजाद अपने दम पर चुनाव जीते हैं। चंद्रशेखर आजाद को लोग इसलिए भी पसंद कर रहे हैं, क्योंकि चंद्रशेखर आजाद को इंडिया गठबंधन ने बीच मझधार में छोड़ दिया था। लोकसभा में चंद्रशेखर आजाद ने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता उनसे मिलने से बच रहे थे। चंद्रशेखर आजाद ने संसद में जिस तरह से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को उच्च शिक्षा न मिल पाने की चिंता जताई, जिस तरह से विनेश फोगाट का मुद्दा उठाया, जिस तरह से जमीनी मुद्दे उठाये। समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के उत्पीड़न का मुद्दा उठाया। उससे वह लगातार लोगों की सहानुभूति बटोर रहे हैं।
चंद्रशेखर आजाद के पक्ष में बड़ा संदेश दे गई दिल्ली में उमड़ी दलितों की भीड़

चरण सिंह
