उग्रवाद की ओर धकेला जा रहा है देश

श्याम सिंह रावत 

खनऊ में कांग्रेस नेता और जेएनयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष डॉ. कन्हैया कुमार पर लखनऊ में एक समारोह के दौरान एसिड मिश्रित तरल पदार्थ फेंककर कुछ लोगों को घायल किये जाने की घटना को आप किस तरह देखते हैं, नहीं मालूम लेकिन मैं इसे नाथूराम गोडसे द्वारा गांधी जी की हत्या वाली दुर्भाग्यपूर्ण ऐतिहासिक घटना का ही विस्तार मानता हूं।

अखबारों में छपी खबरों के अनुसार उक्त घटना के आरोप में पकड़े गए और कानून की पढ़ाई कर रहे छात्र देवांश वाजपेयी ने कहा, “कन्हैया देशद्रोही है। इसका कार्यक्रम लखनऊ में क्यों होना चाहिए। जो देश का नहीं, वो हमारा कैसे हो सकता है। उसे इस देश में रहने का कोई हक नहीं है। इसलिए मैंने उस पर स्याही और केमिकल मिलाकर फेंका था पर वह बच गया।”

वहीं, उक्त तरल पदार्थ से झुलस गये सफदर और शौजब हुसैन ने बताया कि उन पर स्याही नहीं पड़ी। केमिकल में स्याही-सा रंग नहीं था। न ही कपड़े खराब हुए हैं। वहीं, सिविल अस्पताल के डॉक्टरों का भी यही कहना है कि सफदर और शौजब पर जो तरल पदार्थ फेंका गया है वह स्याही नहीं है। जांच की जा रही है कि किस तरह का केमिकल है।

क्या देवांश का “कन्हैया कुमार देशद्रोही है। उसे इस देश में रहने का कोई हक नहीं है।” कहना कोई मामूली बात है और इसे यों ही अनदेखा किया जाना चाहिए? नहीं, क्योंकि यह कब और किसने तय किया कि कन्हैया कुमार देशद्रोही हैं? और इसे कौन तय करेगा कि किसे देश में रहने का अधिकार है या नहीं है? क्या यह सब दिल्ली में जामिया मिल्लिया के छात्रों के प्रदर्शन में तमंचा लहराते हुए जान से मारने की कोशिश कर रहे खुद को रामभक्त कहने वाले गोपाल या देवांश वाजपेयी जैसे लोग निश्चित करेंगे? या फिर वे, जो दिन-रात मुसलमानों और सत्ताधारियों से सवाल पूछने वालों या सरकारी नीतियों और फैसलों का विरोध करने वालों को देशद्रोही बताते हुए पाकिस्तान जाने को कहते हैं?

लखनऊ की घटना में देवांश वाजपेयी द्वारा कन्हैया कुमार पर ख़तरनाक तरल पदार्थ फेंकने की तरह ही दिल्ली में जामिया मिल्लिया के छात्रों को जान से मारने की कोशिश कर रहे खुद को रामभक्त कहने वाले गोपाल के कृत्य को भी अलग करके नहीं देखा जा सकता है। वैचारिक रूप से इन तीनों पात्रों में जरा भी फर्क नहीं है क्योंकि तीनों ही घटनाओं के पीछे वही हिंदूवादी और तथाकथित राष्ट्रवादी उग्र विचारधारा जिम्मेदार है।बहरहाल, देवांश वाजपेयी की इस आक्रामक मनोदशा का कारण वह वातावरण है जिसमें सत्ताधारी वर्ग खुलेआम “गोली मारो सालों को” और “जब मुल्ले काटे जायेंगे, तब राम-राम चिल्लायेंगे” जैसे हिंसा का आह्वान करते नारे लगाते या हत्यारों और बलात्कारियों के समर्थन में तिरंगा लहराते हुए जुलूस निकालता है।

लखनऊ, दिल्ली तथा देश के अन्य हिस्सों में ऐसी घटनाएं होती रहती हैं जिसे हम आये दिन देखते-सुनते हैं और नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन सरकारी संरक्षण में यह फासिस्ट विचारधारा दिन-प्रतिदिन गहराती जा रही है जो ख़तरनाक है। ऊपर से तथाकथित ‘धर्म संसदों’ की श्रृंखला आग में घी डालने का काम कर रही है।

जब सरकार तथाकथित ‘धर्म संसद’ में देश, संविधान, सुप्रीम कोर्ट और सेना के विरुद्ध विषवमन तथा उग्रवादी नारे लगाते जुलूसों को अपना मौन समर्थन दे रही हो तो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होनी ही है।

यदि गहराई से देखें तो वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य के धरातली सच से अछूते और अखंड भारत, हिंदू राष्ट्र, विश्व गुरु जैसे सुनहरे सपनों में खोये तथा अपनी दुर्बलताओं के लिए मुसलमानों को जिम्मेदार मानने वाले अकर्मण्य लोगों के लिए संघियों का फर्जी राष्ट्रवाद और हिंदू सांस्कृतिक पुनर्जागरण का आह्वान किसी संजीवनी से कम नहीं है। उन्होंने इसे हाथों-हाथ लिया और देश में स्वघोषित देशभक्त हिंदुओं की फौज खड़ी हो गयी।

नाथूराम गोडसे के प्रेरणास्रोत देश में नाज़ियों और फ़ासिस्टों की नक़ल पर आधारित साम्प्रदायिक संगठनों ने भारत की सहस्त्रों वर्ष पुरानी वैदिक सभ्यता और संस्कृति को हिंदुत्व का चोला पहना कर झूठ-कपट और छल-प्रपंच का ऐसा मायाजाल फैलाया कि देश की बौद्धिक मेधा-शक्ति पर ग्रहण लग गया। तर्क, प्रमाण, मर्यादा, सिद्धांत, आदर्श, नैतिकता, परंपरा, मानवीय मूल्य, नियम, कानून, संविधान जैसे सामाजिक समरसता के मूलभूत तत्व धराशाई कर दिये गये।

छद्म राष्ट्रवाद और नुमाइशी धर्म की तगड़ी खुराक देकर देश की सहस्राब्दियों पुरानी सर्वधर्म समभाव, वसुधैव कुटुंबकम् और सत्य व अहिंसा जैसे शाश्वत मूल्यों को भुलाकर लोगों के भीतर सशस्त्र राक्षसों की तरह मरो और मारो का विनाशक विचार घनीभूत किया जा रहा है। जिसकी परिणति निश्चित रूप से गृहयुद्ध में होगी और देश विखंडित हो जायेगा क्योंकि देश वर्तमान समय में दो विपरीत विचारधाराओं में विभाजित हो गया है, जिसमें एक ओर गोलवलकर-सावरकर वाला अधिनायकवादी उग्र हिंदुत्व है तो दूसरी तरफ भारत की पुरातन वैदिक संस्कृति से जुड़ा सर्वधर्म समभाव और लोकतंत्र समर्थक एवं संविधान के प्रति निष्ठावान समाज है।

यहां पर दो वक्तव्यों को याद करना समीचीन होगा जिसमें से एक है भाजपा सांसद स्वामी साक्षी महाराज का, जिसमें उन्होंने कहा था कि 2019 का लोकसभा चुनाव देश का अंतिम चुनाव है क्योंकि इसके बाद फिर कोई चुनाव नहीं होगा। दूसरे वक्तव्य में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि हमें अगले पचास साल तक सत्ता से कोई नहीं हटा सकता है।

इन दोनों बयानों को मिलाकर देश की जो तस्वीर उभरती है उसमें संविधान और लोकतंत्र के लिए कोई स्थान नहीं है क्योंकि जिस तरह सत्ताधारियों द्वारा सुनियोजित तरीके से एक ओर देश की संवैधानिक संस्थाओं तथा मीडिया के कामकाज में हस्तक्षेप कर इनको नियंत्रित किया जा रहा है तो दूसरी तरफ विभाजनकारी तत्वों को बढ़ावा देकर देश को उग्रवाद की ओर धकेला जा रहा है, उससे तो साक्षी-शाह की बातें सच होती हुई दिखाई दे रही हैं।

यदि वर्तमान सत्ताधारी वर्ग की संविधान सम्मत सामाजिक व्यवस्था को खत्म कर गोलवलकर-सावरकर की लोकतंत्र-विरोधी अमानवीय विचारधारा लागू करने की कोशिश जारी रहती है तो निश्चित ही देश उग्रवाद की चपेट में आ जायेगा और करोड़ों लोगों का कत्लेआम होगा जो 1947 के दौर से भी अधिक भयावह तथा व्यापक होगा।

  • Related Posts

    यह धरती नरपिशाचों के लिए तो नहीं है
    • TN15TN15
    • March 19, 2026

     राजेश बैरागी यह मनोवैज्ञानिक प्रश्न हो सकता है…

    Continue reading
    आज़ादी की लड़ाई की तर्ज पर आंदोलन कर ही किया जा सकता है बदलाव!
    • TN15TN15
    • March 18, 2026

    चरण सिंह   देश में वोटबैंक की राजनीति…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    यह धरती नरपिशाचों के लिए तो नहीं है

    • By TN15
    • March 19, 2026
    यह धरती नरपिशाचों के लिए तो नहीं है

    अनंत सिंह को मिली जमानत, दुलारचंद यादव मर्डर केस में थे बंद, कब तक आएंगे जेल से बाहर?

    • By TN15
    • March 19, 2026
    अनंत सिंह को मिली जमानत, दुलारचंद यादव मर्डर केस में थे बंद, कब तक आएंगे जेल से बाहर?

    असम BJP की पहली लिस्ट में 88 नाम, प्रद्युत बोरदोलोई को मिला ईनाम!

    • By TN15
    • March 19, 2026
    असम BJP की पहली लिस्ट में 88 नाम, प्रद्युत बोरदोलोई को मिला ईनाम!

    इजरायल के ईरान पर हमले की सजा भुगत रहा कतर! तेहरान ने एनर्जी साइट पर दागीं मिसाइलें, कितना हुआ नुकसान?

    • By TN15
    • March 19, 2026
    इजरायल के ईरान पर हमले की सजा भुगत रहा कतर! तेहरान ने एनर्जी साइट पर दागीं मिसाइलें, कितना हुआ नुकसान?

    शाम की देश राज्यों से बड़ी खबरें

    • By TN15
    • March 18, 2026
    शाम की देश राज्यों से बड़ी खबरें

    ईरान के इंटेलिजेंस मिनिस्टर इस्माइल खातिब को IDF ने किया ढेर, इजरायल के रक्षा मंत्री का बड़ा दावा   

    • By TN15
    • March 18, 2026
    ईरान के इंटेलिजेंस मिनिस्टर इस्माइल खातिब को IDF ने किया ढेर, इजरायल के रक्षा मंत्री का बड़ा दावा