गोटीपुआ, ओडिशा की पारंपरिक लोककला है। युवा पुरुषों द्वारा महिला वेशभूषा पहनकर कला का प्रदर्शन किया गया। पारंपरिक शैली में नर्तकों ने जटिल आंगिक गतियों से उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस नृत्य शैली का उपयोग पौराणिक कथाओं और भगवान जगन्नाथ को समर्पित गीतों को प्रस्तुत करने के लिए किया जाता है। कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कुलपति प्रो अभय कुमार सिंह ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय में ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन से न केवल यहां के छात्र भारतीय संस्कृति की गहराई से परिचित होते हैं, बल्कि उनकी वैश्विक सांस्कृतिक समझ भी विकसित होती है। साथ ही उन्होंने युवाओं को भारत की सांस्कृतिक विरासत से रू-ब-रू कराने के लिए स्पिक मैके के प्रति आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन से पारंपरिक संस्कृति का पुनर्जीवित किया जा सकता है। कार्यक्रम के समापन पर छात्रों ने भारत की वैविध्यपूर्ण लोक संस्कृति से परिचित होने का मौका देने के लिए विश्वविद्यालय और कुलपति के प्रति आभार व्यक्त किया। इस तरह के आयोजन नालंदा में अध्ययनरत विभिन्न देश के विद्यार्थियों में भारत की विविधतापूर्ण संस्कृतियों के प्रति आदर और सम्मान की भावना को विकसित करने मे सहायक होते हैं। इस कार्यक्रम में कुलपति प्रो अभय कुमार सिंह के अलावे कुलसचिव डाॅ आरपी सिंह परिहार, पद्मश्री किरण सेठ, पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय के प्राचार्य आशुतोष कुमार एवं अन्य प्रमुख हस्तियां शामिल हुए।
ओड़िसी लोककला गोटीपुआ के प्रदर्शन से मंत्रमुग्ध हुए दर्शक
राजगीर। श्रीराम जन्मोत्सव रामनवमी के मौके पर बुधवार को नालंदा विश्वविद्यालय के सुषमा स्वराज सभागार में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में भुवनेश्वर (उड़ीसा) के कलाकारों द्वारा ओडिशा के प्रसिद्ध लोकनृत्य गोटीपुआ का भव्य प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन नालंदा विश्वविद्यालय के स्पिक मैके हेरिटेज क्लब के छात्रों द्वारा किया गया।