चरण सिंह
जो लोग बीजेपी को हिंदुत्ववादी पार्टी मानते हैं वे यह समझ लें कि बीजेपी को न तो हिंदुत्व से मतलब है न किसी और धर्म से न ही देश और समाज से उसे तो हिंदुत्व के नाम पर हिंदुओं का वोट साधकर रखना है। काम तो उसे प्रभावशाली लोगों के लिए करना है। अपने मातृ संगठन आरएसएस का हुक्म बजाना है। इसका बड़ा उदाहरण दिल्ली में रेखा सरकार द्वारा एमसीडी से आज़ादी से पहले बसी झुग्गियों और वहां बने प्राचीन मंदिर को तुड़वाना है।
यह अपने आप में दिलचप्स है कि एक ओर प्रधानमंत्री 80 करोड़ लोगों को फ्री राशन देने का दम्भ भरते हैं और दूसरी ओर बीजेपी ने देश की राजधानी और विभिन्न महानगरों में फाइव स्टार होटल की तरह कार्यालय बनवा रखे हैं। मतलब जनता को टुकड़ा दिखाकर प्रभावशाली लोगों को मजे कराते रहो। यह मंदिर और वहां पर बसी झुग्गियां इसलिए तोड़ी गई क्योंकि झंडेवालान मंदिर की फाइव स्टार बिल्डिंग के लिए पार्किंग चाहिए।
इस मंदिर को 1500 साल पुराना बताया जा रहा है जबकि झंडेवालान मंदिर हाल के ही सालों में बना है। इससे समझा जा सकता है कि बीजेपी को मंदिरों और हिन्दुओं की भावनाओं की कितनी चिंता है ? क्योंकि झंडेवालान मंदिर बीजेपी के मातृ संगठन आरएसएस का है। इसलिए गरीब लोगों को उजाड़कर आलिशान बिल्डिंग में आने वाले लोगों की लग्जरी गाड़ियों के लिए पार्किंग की चिंता बीजेपी को ही।
दिलचस्प यह है कि यहां पर कई देवताओं के मंदिर के साथ पीर रतन नाथ की दरगाह भी है। इस मिले जुले स्वरूप के कारण हिंदू, मुस्लिम और अन्य समुदायों के लोग यहां आस्था व्यक्त करते हैं। इस तोड़फोड़ का विरोध हिन्दू मुस्लिम सिख सभी कर रहे हैं पर बीजेपी और उसके अंध समर्थकों को नहीं दिखाई दे रहा है। दिखाई भी कैसे देगा क्योंकि यह सब इन सभी का तो यह खेल है।
यह भी अपने आप में दिलचस्प है कि यह जगह नाथ परंपरा से जुड़ी है, जहां भैरवनाथ, शिव और अन्य देवताओं के साथ पीर रतन नाथ की दरगाह भी है। योगी आदित्यनाथ का मठ बाबा गोरखनाथ भी नाथ परंपरा का है। इस मिले जुले स्वरूप के कारण हिंदू, मुस्लिम और अन्य समुदायों के लोग यहां आस्था व्यक्त करते हैं।
बताया जा रहा है कि करीब 1500 साल पहले गुरु गोरखनाथ के शिष्य रतननाथ हुए और करीब 80 साल पहले बाबा मनमोहन दास ने इस स्थान की स्थापना की थी। यहां बाबा मनमोहन दास और बाबा परिपूर्ण दास की समाधियां भी हैं।








