VVIP इलाका, हथियारों के करतब और उठते सवाल
पटना। मुहर्रम के मौके पर बिहार की राजधानी पटना में उस समय चर्चा तेज हो गई, जब ताजिया जुलूस लेकर कुछ मुस्लिम युवक राबड़ी देवी के सरकारी आवास तक पहुंच गए। इस दौरान लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और उनकी बेटी चंदा यादव ने न सिर्फ जुलूस का स्वागत किया, बल्कि ताजिया की पूजा-अर्चना भी की। युवाओं ने लाठी-डंडे के साथ करतब दिखाए, जिसे लालू यादव ने बैठकर देखा और उनका उत्साहवर्धन किया।
हालांकि, यह पूरा घटनाक्रम विवादों में आ गया है क्योंकि यह जुलूस उस वीवीआईपी इलाके में पहुंचा, जहां आम नागरिकों की गाड़ियों को भी प्रवेश की अनुमति नहीं होती, और हथियार लेकर चलने पर सख्त पाबंदी है। इसके बावजूद लाठी-डंडे जैसे पारंपरिक हथियारों के साथ लोग वहां तक पहुंचे और किसी सुरक्षा कर्मी ने उन्हें रोका तक नहीं।
क्या-क्या हुआ राबड़ी आवास पर:
मुस्लिम समुदाय के लोग ताजिया जुलूस लेकर राबड़ी आवास पहुंचे
लालू प्रसाद यादव ने युवाओं को अंदर बुलाया
राबड़ी देवी और चंदा यादव ने ताजिया की पूजा-अर्चना की
युवाओं ने लाठी-डंडे से करतब दिखाए
लालू यादव ने कुर्सी पर बैठकर यह नज़ारा देखा और प्रशंसा की
प्रशासन पर सवाल:
यह इलाका प्रोटेक्टेड जोन में आता है, जहां हथियारों के साथ प्रवेश पूरी तरह निषेध है। ऐसे में यह सवाल उठ रहे हैं कि—
बिना अनुमति यह जुलूस वीवीआईपी क्षेत्र में कैसे पहुंचा?
सुरक्षा बलों ने हस्तक्षेप क्यों नहीं किया?
क्या कानून सभी के लिए एक जैसा है?
राजनीतिक मायने:
बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह घटना और भी अहम मानी जा रही है। आरजेडी का परंपरागत ‘माई’ समीकरण (मुस्लिम-यादव) फिर से सक्रिय दिख रहा है। वहीं विपक्ष, विशेषकर बीजेपी, एक बार फिर राजद पर ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ का आरोप लगा सकती है।
मुहर्रम एक धार्मिक अवसर है, लेकिन उसका प्रदर्शन अगर संवेदनशील और प्रतिबंधित इलाकों में बिना प्रशासनिक अनुमति के होता है, तो यह कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। प्रशासन की चुप्पी, सुरक्षा मानकों का उल्लंघन और राजनीतिक दलों की भूमिका अब जनचर्चा का विषय बन गई है।

