
सूरजभान सिंह का तीखा पलटवार
इस बयान पर बीजेपी के ही वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सूरजभान सिंह ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने इसे “दुर्भाग्यपूर्ण और पूरी तरह गलत” बताया। सूरजभान सिंह, जो बिहार के झारखंड क्षेत्र से आते हैं और पार्टी के पुराने सिपाही माने जाते हैं, ने कहा:
“ऐसे बयान न केवल अनुचित हैं, बल्कि वे समाज में फूट डालते हैं। बीजेपी एक समावेशी पार्टी है, और गिरिराज जी का यह कथन दुर्भाग्यपूर्ण है। यह पूरी तरह गलत है और पार्टी की एकता को कमजोर करता है।”
सूरजभान का यह बयान पार्टी के अंदरूनी मतभेद को उजागर कर रहा है, खासकर जब बिहार में बीजेपी-नीतीश कुमार गठबंधन की सरकार चल रही है। सूरजभान ने जोर देकर कहा कि राजनीति में ध्रुवीकरण की बजाय विकास और एकता पर फोकस होना चाहिए।
गिरिराज सिंह का यह बयान बिहार में चल रहे चुनावी माहौल में आया है, जहां बीजेपी आरजेडी और अन्य विपक्षी दलों से मुकाबला कर रही है। गिरिराज का बयान हिंदू वोटरों को लामबंद करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इससे अल्पसंख्यक वोटर नाराज हो सकते हैं।
विपक्ष की प्रतिक्रिया: आरजेडी और कांग्रेस ने गिरिराज के बयान की निंदा की है। तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर कहा, “यह नफरत की राजनीति का नमूना है।” वहीं, सूरजभान का समर्थन विपक्ष ने सराहा, इसे बीजेपी में “अच्छे-बुरे हिंदुओं” का संकेत बताया।
पार्टी स्तर पर: बीजेपी आलाकमान ने अभी तक चुप्पी साध रखी है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, गिरिराज को “नरमी” बरतने की हिदायत दी जा सकती है। सूरजभान का स्टैंड पार्टी के मध्य मार्ग धड़े को मजबूत कर सकता है।






