चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच कांग्रेस ने E20 नीति को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाने के कारण चीनी और दूसरे खाद्य पदार्थ महंगे हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इससे वाहन मालिकों को कम माइलेज और गाड़ी से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा रहा है।
इथेनॉल में चला गया गन्ना इसलिए महंगा हुआ चीनी: कांग्रेस
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने 21 फरवरी को एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि मोदी सरकार की E20 नीति के कारण जनता को सड़क रसोई दोनों जगहों पर इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। उनके मुताबिक, गन्ने और अनाज से इथेनॉल बनाने के कारण खाद्य पदार्थ की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा, ‘स्वाभाविक था कि गन्ने और अनाज को इथेनॉल बनाकर 20 फीसदी पेट्रोल में जब मिलाया जाएगा तो एक तरफ गन्ने और अनाज से पैदा होने वाली चीजों की कमी होगी।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘अब स्पष्ट हो गया है कि 25 लाख टन चीनी-लायक गन्ना इथेनॉल में चला गया, जिससे केवल पिछले तीन महीनों में चीनी 48 रुपये से बढ़कर 67 रुपये प्रति किलो और गुड़ 50 रुपये से बढ़कर 65 रुपये प्रति किलो हो गया। चावल 16 और और मक्के का आटा 11 फीसदी महंगा हो गया है। पशु आहार के दाम भी 10.34 फीसदी बढ़े हैं। वाहन मालिकों के पास पेट्रोल के विकल्प भी सीमित कर दिए गए हैं, लेकिन E20 से वाहनों के माइलेज और कंपेबिलिटी पर गंभीर सवाल बने हुए हैं।
पेट्रोल के दाम कम नहीं होने पर उठाए सवाल
उन्होंने इथेनॉल मिलाने के बाद भी पेट्रोल के दामों में कमी नहीं होने को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में कमी और 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने से आई लागत में कमी के बावजूद पेट्रोल के दामों में कोई कमी नहीं की गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार E20 के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार को प्रमुखता से उठा रहे हैं. कांग्रेस कार्यसमिति ने 19 अगस्त को ही E20 के कारण कम माइलेज, वाहनों की कंपेबिलिटी से जुड़े जोखिम और उपभोक्ताओं के सीमित विकल्पों, पर्यावरणीय क्षति के सवालों पर अपनी चिंता जताई थी।
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के गलत फैसलों के कारण जनता महंगे खाने और महंगे सफर की कीमत चुका रही है। उन्होंने कहा, ‘हमारी मांग है कि E20 नीति की तत्काल समीक्षा होनी चाहिए और जनता को बिना इथेनॉल वाले विकल्प मिलने चाहिए. गाड़ी भी महंगी पड़े और रसोई भी, ऐसी जनविरोधी ईंधन नीति देश को स्वीकार्य नहीं हो सकती।
केंद्र ने चीनी जीरो शुल्क पर आयात करने की अनुमति दी
बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने 20 अगस्त को 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी जीरो शुल्क पर आयात करने की अनुमति दी। इस कदम के जरिए सरकार की कोशिश कीमतों को नियंत्रण में रखना है. यह बीते एक दशक में पहला मौका है, जब भारत विदेशों से चीनी आयात करने जा रहा है. दिल्ली में 21 अगस्त को चीनी 65 रुपये किलो मिल रहा है।

