बनारसी ताने-बाने में ‘सुबहे बनारस’

बनारस, काशी, वाराणसी, महादेव की नगरी, घाटों की नगरी, बनारसी साड़ियों का अद्भुत संसार और न जाने क्या-क्या? भगवान भोले की त्रिशूल पर बसी बनारस की महिमा अपरंपार।
गली-गली रौनक से गुलज़ार। पान का बीड़ा लगाए, घरों से सोहर-कजरी अपनी अलग ही राग सुनाता है। सावन की छटा में ऊँची-ऊँची उठती पेंगे आसमान से बातें करती हैं। महामना के पवित्र प्रांगण से सुशोभित विद्या का पवित्र धाम भी इसी बनारस की ही आत्मा है। यहांँ बातों में इतनी मिठास है कि बनारसी गाली होली में रस घोलती रंगों में अठखेलियाँ करती है। रास- रंग के मिश्रण से सराबोर  इसी काशी के कण-कण में भगवान शंकर विराजमान हैं।
हिंदुस्तानी तहजीब, गंगा-यमुनी संस्कृति का सुंदर उपवन है यह बनारस। जन्म-मृत्यु से मोक्षदायिनी बनाने वाली गंगा में हर दिन दिव्य आत्माओं को मोक्ष के दर्शन प्राप्त होते हैं। सुबह और शाम की आरती ‘सुबहे बनारस’ में गूँजते शंखनाद इसकी आध्यात्मिक जीवंत जीवन शैली का दर्शन कराते हैं। यहाँ कला-संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, पंडित रवि शंकर जैसे कलाकारों का ये घर हैं। यही वह बनारस है जहाँ कबीर की वाणी आज भी गूंँज रही है। महात्मा बुद्ध का प्रथम उपदेश भी सारनाथ की धरा में मौजूद बनारस के दर्शन के आध्यात्मिक चरम का प्रदर्शन कराता है। ठुमरी, दादरी, कजरी यहांँ के दिलों पर राज करती हैं।
खानपान में बनारसी पान, ठंडई, कचौड़ी ,लस्सी, मिठाइयाँ और तो और मिट्टी की भीनी खुशबू में कुश्ती करते पहलवानों के दंगल। विज्ञान, अध्यात्म, लोक परंपरा रीति रिवाज़ बनारस के जीवन शैली में इस तरह खुले हुए हैं कि उनसे अलग हटकर दिनचर्या में झाँकना बेमानी सा है।
बनारस कला, परंपरा, रीति-रिवाज का अनूठा संगम है। बुनकरों-कारीगरों के बिना यहाँ की संस्कृति, रीति-रिवाज़ में रंगों की बहार बेमानी सी हो जाएगी। बनारसी साड़ियों का ज़ायका यहाँ के हर जीभ पर है जो छूटता नहीं। पवित्र नगरी गंगा से पूरी तरह नहाई, इतिहास को अपने आँचल में समेटे हुए है। बनारस की राम-कृष्ण लीलाएंँ, मेले में विभिन्न क्षेत्रीय कलाओं, कारीगरों-बुनकरों को प्रोत्साहित करते उनके कलात्मक रूप को न केवल सँवार रहे हैं। बल्कि एक बड़ा बाज़ार भी दे रहे हैं।
घाट के किनारों की छटा, पानी में जहाजों की किलकारियाँ, जन्म से लेकर मृत्युपर्यंत बुनकर विभिन्न प्रकार के बनारसी रेशों से कपड़े बनाते हैं। यही बनारस की विविधता में रंगी भारतीय परंपरा पूरे विश्व में भारत को एक नई पहचान दे रही है। पर्यटन के क्षेत्र में आकर्षण इस क़दर बढ़ रहा है कि विदेशी सैलानी ख़ूबसूरत नज़िरों को देखने वर्ष भर यहाँ आते रहते हैं। योग गुरु बना भारत बनारस की सुंदर झलक को समेटे हुए हैं। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, शिक्षा के केंद्र और प्रमुख पारंपरिक बाज़ार रहाँ की के रौनक हैं ।
बनारसी परिधान क्या बच्चा, क्या युवा और क्या प्रौढ़ सबके अनुसार, सबके लिए, बुनकर- कारीगर सुंदर-सुंदर बनारसी डिजाइन बनाते हैं। साड़ियांँ कुर्ती,लहंँगे पूरी दुनिया में बनारसी कपड़ों की, उनके बुनावट की, उनके डिजाइन की, उनके मजबूत रेशों की बड़ी तेजी से माँग बढ़ रही है। बनारसी रेशों ने विश्व बाज़ार में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। बनारसी जोड़ों में दुल्हन सजना पसंद करती हैं। वैवाहिक उत्सवों में बनारसी साड़ियों की आमद भरपूर की जाती है। तीज- त्योहार, उत्सव, जीवन के किसी भी रंग को उल्लास से भरने के साथ बनारसी कलमकारी अपनी माँग बनाए हुए हैं। यह बनारस की ही परंपरा है कि जन्म से लेकर सभी सोलह संस्कार रंगीन बनारसी रेशों में पूरी तरह से घुले मिले रचे बसे हैं। परमात्मा में मिलते समय भी वह अपनी इस इंद्रधनुषी रेशों में सज कर ही यात्रा प्रस्थान करता है। यह है बनारसी रेशों की हर दिल पर राज करने की हक़ीक़त
डॉ. कल्पना पाण्डेय ‘नवग्रह’ 
  • Related Posts

    दलित चेतना और लोकतंत्र का संकट

    मुदनाकुडु चिन्नस्वामी   चुनाव चाहे कितनी भी नियमितता…

    Continue reading
    गाली गलौज, बदजुबानी क्या आंदोलन के लिए सेहतमंद है?

    दिल्ली शहर में नौजवान पीढ़ी जुल्म ज्यादती, गैर…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    SIR रद्द करो, मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा दो !

    SIR रद्द करो, मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा दो !

    प्रदर्शन के बीच हिरासत में Ex-CM ममता, केजरीवाल और विजयन, BJP बोली- अराजकता की कोशिश

    प्रदर्शन के बीच हिरासत में Ex-CM ममता, केजरीवाल और विजयन, BJP बोली- अराजकता की कोशिश

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और महाभियोग की मांग को लेकर किसान सभा व किसान एकता संघ का प्रदर्शन

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और महाभियोग की मांग को लेकर किसान सभा व किसान एकता संघ का प्रदर्शन

    सुनो ए ताना शाह

    सुनो ए ताना शाह

    ‘मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए’, CJP प्रोटेस्ट से पहले SC की टिप्पणी

    ‘मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए’, CJP प्रोटेस्ट से पहले SC की टिप्पणी

    ट्रेनें रद्द होने पर चिराग पासवान बोले, ‘युवाओं को कोई नहीं रोक सकता प्रभु’

    ट्रेनें रद्द होने पर चिराग पासवान बोले, ‘युवाओं को कोई नहीं रोक सकता प्रभु’