कड़क धूप मक्का किसानों के लिए साबित हो रहा वरदान

3 दिनों में सूखने वाला मक्का 1 दिन में हो रहा तैयार

सुबह में पसारी गयी कच्चा दाना शाम में बजने लगता है झनाझन

दांतों तले कट से बजना होता है सुखी मक्का की बानगी

भवेश
मुजफ्फरपुर। जिले के प्रखंड एवं आसपास के इलाकों में लगातार भीषण गर्मी से जहां लोग परेशान हैं।पालतू एवं जंगली जानवर से लेकर पशु पक्षी तक हलकान हैं। वही कड़क धूप और भीषण गर्मी मक्का किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहा है। लिहाजा क्षेत्र के किसानों के द्वारा तन झुलसाती भीषण गर्मी के बावजूद कड़ी धूप में तैयार मक्का के बालियों को छुड़ाने एवं सुखाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है।

जिसको जहां मौका मिल रहा है, अपने दरवाजे और खेत खलिहान से लेकर पास के सड़क, पुल-पुलियों, सार्वजनिक स्थलों तक युद्ध स्तर पर मक्का के बालियों से दाना छुड़ाने से लेकर दाना सूखाने का काम युद्ध स्तर पर लगातार किया जा रहा है। हालांकि इस दौरान लगातार काम की वजह से किसान और मजदूर बीमार भी पड़ रहे हैं, बावजूद ताक के इस समय में मक्का की तैयारी जोड़ों पर है।

हालांकि असहज स्थिति के बीच कुछ किसानों के द्वारा दिन में धूप में मक्का को सुखाकर रात में उसे बोरा बंद आदि करते देखा जाता है। पर्याप्त धूप एवं गर्मी होने की वजह से तीन दिन में सूखने वाला मक्का का दाना औसतन एक दिन में ही तैयार हो जा रहा है। किसानों ने बताया कि पीच या ढलुआ सड़क पर मक्का पसार देने से दोगुनी- तिगुनी क्षमता से धूप का असर होता है और दाना एक दिन में सुखकर तैयार हो जाता है।

वही दरवाजे से लेकर घास वाले सार्वजनिक जगहों पर मछली मारने वाले चट्टी जालों पर किसानों के द्वारा मक्का सुखाया जाता है। ऐसे में अंदर मक्का पसिझता(घमता) नहीं है। इससे भी मक्का आसानी से जल्दी सूख जाता है। वही पॉलिथीन सीटों, पन्नियों या त्रिपालों पर मक्का पसारने पर मक्का के दाना पसिझने(घमने) की वजह से इसे सुखाने में तीन दिन तक का समय लग जाता है।

 

गांव में हीं पहुंच रहे व्यापारी 

 

सूखने के साथ ही गांव-गांव घूम कर मक्का खरीदारों के द्वारा औसतन 2हज़ार रुपए प्रति क्विंटल के दर से मक्का की खरीद भी की जा रही है। मक्का सूखने के साथ ही वहीं खरीदार पिकअप गाड़ी लेकर पहुंच जा रहे हैं और किसानों को सहज रूप से उनके मेहनत का दाम भी मिल जा रहा है।

 

बन्दरा एवं आसपास के इलाकों में मक्का की हुई है व्यवसायिक खेती 

 

किसानों ने बताया कि अबकी बन्दरा प्रखंड के पूर्वी क्षेत्र एवं पड़ोसी समस्तीपुर एवं दरभंगा जिला क्षेत्रों के नजदीकी गायघाट,हनुमाननगर,सिंहवाड़ा,कल्याणपुर आदि प्रखंडों के दर्जनों गांव के चौर वाले इलाकों में खेतों में पर्याप्त मात्रा में पीले मक्का की खेती की गई है, हालांकि यह इलाका गेहूं उत्पादन के लिए जाना जाता है, लेकिन अन्य वर्षो के मुकाबले अबकी बार प्रायः किसानों ने ज्यादातर खेतों में पीले मक्का की खेती की है।
पीले मक्का की खेती इन इलाकों में व्यावसायिक तौर पर की गई है। किसानों का बताना है कि औसतन एक से डेढ़ क्विंटल प्रति कट्ठा की दर से यहां पीले मक्का का उत्पादन हुए हैं। जिसकी बेहतर खेती हुई है उसका उत्पादन इससे ज्यादा भी हुआ है। लिहाजा मक्का तैयारी को लेकर किसान लगातार दिन-रात लगे हुए हैं।

 

अब मशीनों से होती है तैयारी

 

किसानों ने बताया कि पहले मक्का की कम खेती होने की वजह से लोग मजदूर से हाथ से बोलियों से दाना छूराते थे। अब मशीनों से बालियों से दाना छुड़ाकर मजदूरों से सुखायी जा रही है। वहीं कई किसानों के द्वारा मशीन से ही खेत में लगे मक्का के पेड़ों से बालियां तोड़ने के साथ ही उसकी दौनी कर ली जाती है। जिससे कम समय में हीं मक्का तैयार हो रहे हैं।

 

मौसम विभाग का अनुमान

 

ने फिलहाल कड़क धूप एवं गर्मी से राहत नहीं मिलने का अनुमान लगाया है। मौसम वैज्ञानिकों का बताना है कि 15 जून के बाद ही बारिश की स्थिति बन सकती है। फिलहाल धूप एवं गर्मी से राहत मिलने की संभावना नहीं है। लिहाजा ऐसे में मक्का के किसानों को तेजी से मक्का तैयार कर संरक्षित कर लेने की सलाह दी गई है।

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