हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने स्टालिन के दौरे का कड़ा विरोध किया। बीजेपी प्रवक्ता नारायण तिरुपति ने स्टालिन के पुराने बयानों, खासकर सनातन धर्म और हिंदी विरोध से जुड़े बयानों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। बीजेपी ने इसे विपक्षी एकता को ‘दिखावा’ करार देते हुए जनता को सतर्क करने की कोशिश की। बीजेपी का कहना है कि स्टालिन जैसे नेताओं के बयान उनकी यात्रा की मंशा पर सवाल उठाते हैं।
यह यात्रा, जो 17 अगस्त को सासाराम से शुरू हुई और 1 सितंबर को पटना में समाप्त होगी, 16 दिनों में 1300 किलोमीटर की दूरी तय कर रही है। इसमें प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, सिद्धारमैया जैसे विपक्षी नेता भी शामिल हो रहे हैं, जिससे यह बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले एक महत्वपूर्ण सियासी कदम बन गया है।








