चंद्रशेखर आजाद की बड़ी मुश्किले
मनोज वाल्मीकि
लोकसभा चुनाव में भाजपा के पत्ते खुलने के बाद सपा कांग्रेस गठबंधन ने भी खोले पत्ते, पूर्व जज मनोज कुमार पर खेला दाव, चंद्रशेखर आजाद को जोर का झटका धीरे से लगा। जबकि बीएसपी मुखिया मायावती इस बार सांसद गिरीश चंद का भारी विरोध होने के कारण उनके स्थान पर किसी नए चेहरे को चुनाव मेंदान में उतार सकती है। यदि मायावती ने अपने भतीजे आनंद कुमार को नगीना सीट से चुनाव उतरा तो इस सीट पर चुनाव रोमांचक हो जाएगा इस बार माया अखिलेश का गठबंधन नहीं होने के कारण भाजपा प्रत्याशी सब पर भारी हो सकता है।
18 वीं लोकसभा का चुनाव की चुनाव आयोग द्वारा सात चरणों में मतदान होने का की घोषणा करती है चुनाव के घोषणा होते ही आचार संहिता भी लागू हो चुकी है लोकसभा का चुनाव का पहला चरण 19 अप्रैल 2024 को होगा 19 अप्रैल के पहले चरण में नगीना लोकसभा सुरक्षित सीट पर मतदान होना है चुनाव का पारा अब राजनीतिक दलों के साथ-साथ मतदाताओं के सर परवान चढ़ने लगा है। सभी स्थानों पर लोग चुनावी चर्चा करते देखे जा रहे हैं। नगीना लोकसभा सुरक्षित सीट से भाजपा ने अपने पत्ते खोलते हुये नगीना लोकसभा सुरक्षित सीट से लोकल और नहटोर से तीन बार से विधायक बनते आ रहे ओम कुमार को चुनावी रण मे उतार उम पर दाव खेला है, भाजपाइयों में खुशी की लहर और एकजुटता दिख रही है, भाजपा प्रत्याशी ओम कुमार ने 2012 में पहले चुनाव बीएसपी और 2017 — 2023 का चुनाव भाजपा के सिंबल पर जीता है, चुनाव हार का रिकॉर्ड उनके नाम नहीं है। ओम कुमार चुनाव मैदान में है।
उधर सपा कांग्रेस गठबंधन ने अपने पत्ते खोलते हुये लोकसभा चुनाव में सपा कांग्रेस गठबंधन सपा मुखी अखिलेश यादव ने सभी अटकलो को दरकिनार करते हुए पूर्व जज मनोज कुमार को चुनावी रण में उतारा है, पूर्व जज मनोज कुमार को सपा गठबंधन द्वारा प्रत्याशी बनाए जाने से अखिलेश यादव के करीबी बताने वाले आजाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद को धीरे का झटका जोर का लगा है। क्योंकि चंद्रशेखर आजाद को गठबंधन का प्रत्याशी बनने कि पूरी उम्मीद थी के सपा प्रमुख पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव उन्हीं को नगीना लोकसभा सीट से गठबंधन का प्रत्याशी बनाएंगे जिसके लिए बहुत समय से क्षेत्र में मेहनत और कार्य कर रहे आ रहा था साथ ही सपा मुखिया पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव ने राम भक्तों पर गोलियां बरसाई थी उनही के पद चिन्हों पर चलकर छोटी बड़ी जनसभाओं में राम भक्तों मनुवादियों और केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकारों आरएसएस बजरंग दाल विश्व हिंदू परिषद समेत सभी हिंदूवादी संगठनों को कोसते रहे और आज भी कोस रहा है लेकिन सपा मुख्य अखिलेश यादव ने आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार को पूरी तरह से ना कर दिया और मनोज जज को चुनाव मैदान में उतार दिया चंद्रशेखर आजाद चुनावी मैदान में तो डेट हैं लेकिन सांसद बनने की सभी उम्मीदें सिरे से समाप्त हो चुकी है क्योंकि उनका अपना कोई वोट बैंक आधार नहीं है मुस्लिम वोट सपा कांग्रेस गठबंधन के खाते में माना जा रहा है। दलित जाटव वोट माया के कोटे में माना जाता है, फिर कौन सा आधार उनको सांसद बनने का है खुद चंद्रशेखर को भी दिखाई नहीं दे रहा है फिर भी चुनाव प्रचार में बाजी मार रहे हैं ।
जबकि बीएसपी प्रमुख पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं क्योंकि मायावती इस बार भी पार्टी की जीत को बरकरार रखने के लिए सांसद गिरीश चंद्र के स्थान पर इस बार नया चेहर चुनाव मैं उतरना चाहती है । बीएसपी सांसद गिरीश चंद का क्षेत्र और क्षेत्रवासियों के लिए रूखा व्यवहार होने के कारण उनका भारी पैमाने पर विरोध हो रहा था जो अखबार की सुर्खियां रही, संसद गिरीश चंद्र का विरोध होते देख ऊपर से पार्टी कार्यकर्ताओं में भी खासी नाराजगी को देखते हुए मायावती ने नया चेहरा उतारने का मन पहले ही बना लिया था अब नया चेहरा कौन होगा यह कहना तो मुश्किल है लेकिन नगीना सीट से मायावती के भतीजे आनंद कुमार के चुनाव मैदान में आने की चर्चा जोर शोर से हो रही है। इस बार अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ रही हैं और नगीना सीट पर अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए मायावती इस बार अपने भतीजे आनंद कुमार को नगीना लोकसभा सु सीट से चुनाव लड़ा सकती हैं जो हर किसी की जुबान पर है। यदि आनंद कुमार चुनाव मैदान में आते हैं तो चुनाव रोमांचक हो जाएगा। क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री मायावती अपने भतीजा आनंद को चुनाव जीतने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे
बरहाल बीएसपी से कौन उम्मीदवार होगा कौन नहीं यह कहना तो अभी ठीक नहीं है लेकिन यहां सपा और बीएसपी को अपना घर और गढ़ बढ़ाने की खुली चुनौती रहेगी क्योंकि इस बार भाजपा ने भी स्थानीय उम्मीदवार के रूप में ओम कुमार को चुनावी रण में उतारा है जिसका भाजपाइयों में जरा भी विरोध नहीं है जो भाजपा की जीत का ठोस आधार रहेगा।
नगीना