वर्तमान में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र व अन्य जगहों पर चल रहे मजदूर आंदोलन मजदूरों के कुछ मौलिक मुद्दे उठा रहे हैं जिनका समाधान जरूरी है। न्यूनतम मजदूरी की मांग मासिक रु. 20,000 से रु. 26,000 तक की हो रही है जब कि अभी तो कुछ जगहों पर इसकी आधी मिल रही है। काम के घंटे एक लम्बे आंदोलन के बाद 8 निश्चित किए गए थे लेकिन अब उसे बढ़ाने की कोशिश हो रहीे है। हम मांग करते हैं कि काम के 8 घंटे के साथ कोई छेड़-छाड़ न हो और यदि मजदूर अतिरिक्त समय काम करना चाहे तो से बढ़े हुए घंटे की दोगुना मजदूरी दी जाए। ठेका व संविदा श्रेणी खत्म की जानी चाहिए व सभी भर्तियां नियमित रोजगार के लिए होने चाहिए। एक काम के लिए एक मजदूरी दर का सिद्धांत लागू किया जाए। कर्मचारी भविष्य निधि व कर्मचारी राज्य बीमा की सुविधा हरेक मजदूर को मिलनी चाहिए ताकि उसे काम की जगह एक सुरक्षा का एहसास हो।
मजदूरों के अधिकारों के साथ छेड़-छाड़ करते हुए जो चार मजदूर संहिताएं लाई गई हैं उन्हें वापस लिया जाना चाहिए। मजदूर अधिकारों में वृद्धि होनी चाहिए न कि कमी।वर्तमान आंदोलन में कई मजदूर कार्यकर्ता व नेता गिरफ्तार किए गए हैं। उन्हें तुरंत रिहा करते हुए उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं। बेहतर होगा यदि सरकार मजदूर आंदोलन को कानून और व्यवस्था की समस्या न मानते हुए मजदूरों द्वारा उठाए गए उपर्यक्त मुद्दों को हल करे।सोशलिस्ट मजदूर सभा एवं सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) मजदूरों की मांगों के साथ मजबूती से खड़ी है। हमारे नीति निर्माताओं, जन प्रतिनिधियों, अधिकारियों व न्यायाधीशों को सोचना चाहिए कि यदि उन्हें इतने कम वेतन पर काम करने को कहा जाए तो क्या वे अपने परिवार का खर्च इसमें चला पाएंगे?

