अब आईएईए ने कर दिया परमाणु बनाने के सबूत मिलने से इनकार
दरअसल अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने हाल ही में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई नई रिपोर्ट जारी नहीं की है, जिसने सीधे तौर पर इजरायल-ईरान युद्ध को भड़काया हो। हालांकि, जून को IAEA ने ईरान को परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत अपनी जिम्मेदारियों का उल्लंघन करने वाला घोषित किया था, जिसके बाद इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले शुरू किए।
IAEA की स्थिति: IAEA के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने 19 जून 2025 को कहा कि उनके पास ईरान के सक्रिय परमाणु हथियार कार्यक्रम का कोई ठोस सबूत नहीं है। यह बयान इजरायल के दावों के विपरीत है, जिसमें कहा गया था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। ग्रॉसी ने यह भी बताया कि ईरान ने 60% तक समृद्ध यूरेनियम का भंडार जमा किया है, जो हथियार-ग्रेड (90%) से थोड़ा कम है, लेकिन यह साबित नहीं करता कि ईरान हथियार बना रहा है।
इजरायल का रुख: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान “परमाणु हथियार के निर्माण की ओर बढ़ रहा है” और उनके हमले इस खतरे को रोकने के लिए थे। इजरायल ने नतांज, फोर्डो, और इस्फ़हान जैसे परमाणु ठिकानों पर हमले किए, जिससे नतांज में बिजली आपूर्ति और सेंट्रीफ्यूज को भारी नुकसान हुआ।
ईरान का जवाब: ईरान ने इन हमलों को “अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” करार दिया और दावा किया कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है। ईरान ने जवाबी हमले किए, जिसमें तेल अवीव और हैफा जैसे इजरायली शहरों पर मिसाइलें दागी गईं।
IAEA का “पलटना”: कुछ X पोस्ट्स में दावा किया गया कि IAEA ने अपने पहले के निष्कर्षों से यू-टर्न लिया है, लेकिन यह पूरी तरह सटीक नहीं है। IAEA ने ईरान की गैर-पारदर्शिता और सहयोग की कमी की आलोचना की थी, लेकिन यह कभी नहीं कहा कि ईरान निश्चित रूप से परमाणु हथियार बना रहा है। ग्रॉसी का बयान केवल इस बात की पुष्टि करता है कि कोई ठोस सबूत नहीं मिला, जो इजरायल के हमलों के औचित्य पर सवाल उठाता है।
वर्तमान स्थिति: युद्ध सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है, और दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ रहा है। IAEA ने चेतावनी दी है कि परमाणु सुविधाओं पर हमले रेडियोलॉजिकल और रासायनिक खतरे पैदा कर सकते हैं। ईरान ने NPT से बाहर निकलने की धमकी दी है, जिससे स्थिति और जटिल हो सकती है।
निष्कर्ष: IAEA ने ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम की पुष्टि नहीं की, बल्कि उसकी गैर-पारदर्शिता पर चिंता जताई। इजरायल ने अपने खुफिया दावों के आधार पर हमले किए, लेकिन IAEA का हालिया बयान इन दावों को कमजोर करता है। यह युद्ध क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा बना हुआ है।







