चरण सिंह
तो क्या चुनाव परिणाम से पहले ही गृह मंत्री अमित शाह ने योगी आदित्यनाथ के हाथ से कमान छीन ली है ? क्या अमित शाह राजपूतों की बीजेपी से बगावत के पीछे योगी आदित्यनाथ का हाथ मान रहे हैं। क्या बीजेपी में भूचाल मचने वाला है ? दरअसल एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश का चुनाव योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लड़ने की बात करते हुए 2014 का रिकॉर्ड तोड़ने की बात कर रहे हैं। योगी आदित्यनाथ जैसे साथी पर गर्व कर रहे हैं। योगी को अपना भी मुख्यमंत्री मान रहे हैं। उधर दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सारथी अमित शाह ने उत्तर प्रदेश की बागडोर अपने हाथ में ले ली है।

बताया जा रहा है कि अमित शाह ने कानपुर में आसपास के जिलों के नेताओं की बैठक ली। इस बैठक में 300 से अधिक नेता बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस बैठक में उत्तर प्रदेश के प्रभारी बैजयंत पांडा और अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी तो मौजूद थे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद नहीं थे। मतलब उत्तर प्रदेश में बिना योगी आदित्यनाथ के अमित शाह ने कार्यकर्ताओं की बैठक ली। इतना ही नहीं उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिये। क्षेत्र की जानकारी उनके व्हाट्सएप नंबर पर भेजी जाए।
उन्होंने मतदाताओं के घर तीन बार जाने के निर्देश दिये हैं। ऐसे में प्रश्न उठता है कि यदि गृह मंत्री अमित शाह सीधे कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेंगे तो फिर योगी आदित्यनाथ क्या करेंगे ? क्या योगी आदित्यनाथ 4 जून से पहले ही मुख्यमंत्री पद से हटा दिये जा सकते हैं ? यदि योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद से हटाया जाएगा तो क्या राजपूत समाज इतनी आसानी से मान जाएगा। वैसे भी राजपूत समाज की पंचायतों में मोदी और अमित शाह को दो गुजरातियों की संज्ञा देते हुए उनको यूपी से खदेड़ने का दंभ राजपूत भर रहे हैं।

देखने की बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह राजपूत समाज पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले राजकोट से भाजपा प्रत्याशी पुरुषोत्तम रुपाला पर कोई एक्शन नहीं ले रहे हैं तो योगी आदित्यनाथ बीजेपी के खिलाफ होने वाली राजपूतों की पंचायतों के खिलाफ कुछ नहीं बोल रहे हैं।
अमित शाह ने इस बैठक में यह भी कहा है कि उत्तर प्रदेश में संगठन कमजोर है। 2014 के लोकसभा चुनाव में 74 तथा 2017 में पूर्ण बहुमत के साथ योगी सरकार सरकार बनाने के साथ ही 2019 में 63 सीटें लाने वाले उत्तर प्रदेश में संगठन कैसे कमजोर हो गया? यह हमला अमित शाह का योगी आदित्यनाथ पर माना जा रहा है। तो क्या 4 जून से पहले ही योगी आदित्यनाथ को साइड लाइन कर उत्तर प्रदेश को कोई दलित या ओबीसी मुख्यमंत्री दिया जा सकता है ? यदि ऐसा हुआ तो योगी आदित्यनाथ के समर्थक चुप बैठ जाएंगे क्या ? दरअसल खुद बीजेपी में भी मोदी के बाद योगी को मुख्यमंत्री मानते हैं। देश योगी आदित्यनाथ को मोदी के बाद प्रधानमंत्री के रूप में देख रहा है। यदि योगी को साइड लाइन किआ आया तो देश में बवाल मचना तय है।







