बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले नीतीश कुमार को उपराष्ट्रपति (VP) बनाने का प्रस्ताव भारतीय जनता पार्टी (BJP) की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, लेकिन यह योजना जटिल और जोखिम भरी है। यह विचार कुछ BJP नेताओं, जैसे बिहार विधायक हरिभूषण बचौल और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी द्वारा समर्थित किया गया है, जिसका उल्लेख हाल के समाचारों और सोशल मीडिया चर्चाओं में मिलता है। हालांकि, इस ‘VP प्लान’ से NDA के रणनीतिकारों के भागने की संभावना कई कारणों से उभरती है:
‘VP प्लान’ की पृष्ठभूमि
नीतीश की राजनीतिक अहमियत: नीतीश कुमार, जनता दल (यूनाइटेड) (JD(U)) के नेता और बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे हैं, जिनका बिहार की जातिगत समीकरणों, खासकर अति-पिछड़ा वर्ग (EBC) और कुर्मी-कोइरी समुदायों पर मजबूत प्रभाव है। उनकी उपस्थिति NDA को बिहार में सामाजिक गठजोड़ को मजबूत करने में मदद करती है, खासकर गैर-यादव OBC और कुछ दलित समुदायों के बीच।indiatoday.inindiatoday.in
BJP की रणनीति: BJP बिहार में अपनी स्थिति को और मजबूत करना चाहती है, लेकिन नीतीश की बार-बार गठबंधन बदलने की प्रवृत्ति (उन्हें ‘पलटू राम’ उपनाम मिला है) और उनकी उम्र व स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण कुछ BJP नेता उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर उपराष्ट्रपति जैसे पद पर भेजकर बिहार में नया नेतृत्व स्थापित करने की सोच रहे हैं।
नीतीश का खंडन: नीतीश ने इस तरह की अटकलों को खारिज किया है, और JD(U) ने स्पष्ट किया है कि वह बिहार में NDA के चेहरे के रूप में नीतीश को ही प्रोजेक्ट करेगा।
क्यों भाग सकते हैं NDA के रणनीतिकार?
नीतीश की अपरिहार्यता: बिहार में नीतीश की लोकप्रियता और सामाजिक आधार, खासकर EBC, कुर्मी, और महिलाओं के बीच, उन्हें NDA के लिए अपरिहार्य बनाता है। उन्हें उपराष्ट्रपति बनाकर हटाने से BJP को इन समुदायों का समर्थन खोने का जोखिम है, जो RJD और अन्य विपक्षी दलों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
गठबंधन में तनाव: BJP के कुछ नेताओं, जैसे उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, ने नीतीश के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं, जिससे गठबंधन में दरार की आशंका है। अगर नीतीश को हटाने की कोशिश की गई, तो JD(U) अलग हो सकता है या बिहार में मध्यावधि चुनाव की नौबत आ सकती है, जो BJP के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
चिराग पासवान का कारक: लोजपा (रामविलास) के नेता चिराग पासवान, जो NDA के सहयोगी हैं, ने सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है, जिससे JD(U) को खतरा महसूस हो रहा है। BJP के कुछ नेताओं द्वारा चिराग को CM के रूप में प्रोजेक्ट करने की चर्चा ने नीतीश के साथ तनाव बढ़ाया है। यह तनाव NDA की एकजुटता को कमजोर कर सकता है।
RJD का अवसर: RJD, विशेष रूप से तेजस्वी यादव और लालू प्रसाद यादव, नीतीश को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहे हैं। अगर BJP नीतीश को उपराष्ट्रपति बनाकर बिहार से हटाने की कोशिश करती है, तो नीतीश फिर से महागठबंधन की ओर जा सकते हैं, जिससे NDA की रणनीति उलटी पड़ सकती है।
चुनावी जोखिम: बिहार में 2020 के विधानसभा चुनाव में JD(U) को 43 सीटें मिलीं, जबकि BJP को 74, फिर भी नीतीश CM बने। नीतीश के बिना चुनाव लड़ना BJP के लिए जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि उनकी अनुपस्थिति में RJD और कांग्रेस का INDIA गठबंधन मजबूत हो सकता है, खासकर मुस्लिम और यादव वोटों के समर्थन से।






