चरण सिंह
क्या सरकारें किसी जाति-धर्म विशेष के लिए बनती हैं ? क्या देश और सूबे के अभिभावक को जाति-धर्म विशेष की ही चिंता करनी चाहिए ? यदि नहीं तो फिर क्यों पीएम और सीएम की ओर से जाति धर्म विशेष पर आधारित बयान क्यों सुनने को मिलते हैं ? लोकसभा चुनाव में पीएम की ओर से एक धर्म विशेष के खिलाफ भाषण क्यों सुनने को मिला ? अब प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुर्शिदाबाद हिंसा के बाद इमामों की ही बैठक क्यों बुलाई ? क्या प. बंगाल में हिन्दू नहीं हैं ? क्या ममता बनर्जी को सभी वर्गों और धर्म की चिंता नहीं करनी चाहिए ? क्या ऐसे में हम आज के नेता को देश और समाज का नेता कह सकते हैं ?
उधर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने एक डिबेट में यूपी का उदाहरण देते हुए कहा कि जब यूपी में एक सांसद के घर पर तोड़फोड़ की जा रही है। विपक्ष के सबसे बड़े नेता अखिलेश यादव के खिलाफ गलत टिप्पणी की जा रही है और सूबे के मुख्यमंत्री कुछ नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में प. बंगाल की ही बात नहीं की जा सकती है। यूपी की भी बात करनी पड़ेगी।
सपा प्रवक्ता का कहना है कि जब बीजेपी के लोग अराजकता फैलाएंगे तो फिर दूसरे प्रदेशों में दूसरी पार्टियों के लोगों को कैसे रोका जा सकता है। बात दोनों ओर की होनी चाहिए।
राजकुमार भाटी का सीधा-सीधा कहना है कि यदि बीजेपी एक धर्म को टारगेट करेगी तो दूसरे धर्म को आप कैसे रोक सकते हैं ? उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि यदि ये चलता रहा तो फिर लोगों को सड़कों पर उतरना ही पड़ेगा। मतलब देश में अमन चैन की बात नहीं की जाएगी। प्यार मोहब्बत की बात नहीं की जाएगी। साम्प्रदायिक सौहार्द का प्रयास नहीं होगा। बस जाति और धर्म के नाम पर नफरत का जहर घोलकर वोटबैंक की फसल तैयार की जाती रहेगी। इसमें दो राय नहीं कि बीजेपी धर्म की राजनीति कर रही है। पर विपक्ष के दल क्या कर रहे हैं ? क्या पीडीए ही समाजवाद है ? या फिर पीडीए के विकास से प्रदेश और देश का विकास किया जा सकता है ?
यदि करनी सेना का इस्तेमाल बीजेपी कर रही है तो फिर रामजी लाल सुमन से राज्य सभा में राणा सांगा को गद्दार किसने कहलवाया ? यह दलित और मुस्लिम वोट बैंक पर डोरे डालना नहीं है ? प बंगाल में टीएमसी की मुखिया ममता क्या कर रही हैं ? क्या मुस्लिमों के वोट के लिए ममता बनर्जी हिन्दुओं का उत्पीड़न नहीं करवा रही हैं क्या ? क्या मुर्शिदाबाद में हिंसा के बाद ममता बनर्जी को मुस्लिमों को लेकर बैठक करनी चाहिए थी ? सूबे की अभिभावक होने की वजह से हर वर्ग और समाज के लोगों की मीटिंग नहीं करनी चाहिए थी ? पर ममता बनर्जी ने क्या किया ?
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में राज्यभर से आए इमामों के साथ बैठक की। बैठक में केंद्र में वक्फ कानून समेत मुर्शिदाबाद, मालदा और भानगढ़ में हुई हिंसक घटनाओं चर्चा की गई। देखने की बात यह है कि मुर्शिदाबाद से पलायन तो हिन्दू कर रहे हैं पर ममता बनर्जी को चिंता मुसलमानों की है। मतलब ममता बनर्जी का वोट बैंक मुसलमान हैं। इसलिए वह मुसलमानों पर ध्यान दे रही हैं। ऐसे ही उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन ने मुसलमानों को खुश करने के लिए राणा सांगा को गद्दार बोल दिया।
यह ममता बनर्जी का मुसलमानों पर विशेष ध्यान देना ही है कि
ऑल इंडिया इमाम मुअज्जिन एंड सोशल वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन के जनरल सेक्रेटरी मौलाना अब्दुल रज्जाक ने ममता बनर्जी पर भरोसा जताते हुए कहा कि वक्फ संशोधन कानून को बंगाल में लागू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कानून मुस्लिम समुदाय की जमीन और हक को छीनने वाला है और इसे ममता बनर्जी ही रोक सकती हैं।
ऑल इंडिया इमाम मुअज्जिन एंड सोशल वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन के जनरल सेक्रेटरी मौलाना अब्दुल रज्जाक ने ममता बनर्जी पर भरोसा जताते हुए कहा कि वक्फ संशोधन कानून को बंगाल में लागू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कानून मुस्लिम समुदाय की जमीन और हक को छीनने वाला है और इसे ममता बनर्जी ही रोक सकती हैं।
प.बंगाल के मुसलमान तो ममता बनर्जी तो भावी पीएम के रूप में देख रहे हैं। दरअसल 8 अप्रैल से मुर्शिदाबाद, मालदा, भानगढ़ और दक्षिण 24 परगना में हिंसक प्रदर्शन हुए, जिनमें तीन लोगों की मौत हुई और 150 से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए गए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहनों में आग लगाई, पथराव किया. कलकत्ता हाई कोर्ट ने हिंसा पर सख्ती दिखाते हुए BSF की तैनाती के आदेश दिए।








