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SIR विवाद: जस्टिस भुइयां की टिप्पणी पर पवार गुट ने कहा, ‘हमारे संविधान…’

शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP(SP) ने सोमवार को मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां की आलोचनात्मक टिप्पणियों का समर्थन किया। भुइयां ने रविवार को हैदराबाद के नलसार यूनिवर्सिटी में कहा कि लाखों भारतीय नागरिकों को उनके मताधिकार से ‘वंचित’ करने वाली कोई भी प्रक्रिया ‘मूल रूप से मनमानी’ और संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है।

टिप्पणियों का समर्थन करते हुए एनसीपी (एसपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने कहा कि लाखों लोगों को मनमाने ढंग से मताधिकार से वंचित करना नागरिकों के मतदान के मौलिक अधिकार के खिलाफ है। क्रास्टो ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की दलीलें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भारत निर्वाचन आयोग के कथित गलत कामों को छिपाने की कोशिश का संकेत थीं।
 

जस्टिस भुइयां का बयान लोकतंत्र को कायम रखता है- क्रास्टो

 

क्रास्टो ने मीडिया से बातचीत में बताया, “एसआईआर मुद्दे पर जस्टिस भुइयां का बयान हमारे संविधान और लोकतंत्र को कायम रखता है। मतदाताओं को मनमाने ढंग से मताधिकार से वंचित करना उनके मतदान के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। जस्टिस भुइयां ने ‘नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ’ में आयोजित 19वीं न्यायमूर्ति बोध राज साहनी मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन कार्यक्रम में कहा कि भारत का संविधान नागरिकों को दो वर्गों में नहीं बांटता, जिनमें से एक वर्ग मताधिकार प्राप्त हो और दूसरा मताधिकार से वंचित हो। उन्होंने कहा कि व्यापक पैमाने पर भारतीय नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 और 14 का सीधा उल्लंघन होगी।

 

 

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP का प्रदर्शन

 

 

विपक्षी दल और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी), साथ ही नागरिक संस्थाएं कथित तौर पर एसआईआर प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए देशभर में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। सत्तारूढ़ भाजपा और निर्वाचन आयोग ने एसआईआर का बचाव करते हुए कहा है कि यह प्रक्रिया सभी कानूनों और संवैधानिक मानदंडों का पालन करते हुए की जा रही है।

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