Single use Plastic Ban : फैक्ट्रियों को बंद किये बिना Plastic Ban की बात करना बेमानी 

Single use Plastic Ban : प्लास्टिक बिक्री रोकने से ज्यादा ध्यान देना होगा प्लास्टिक बनाने से रोकने पर 

Single use Plastic Ban: प्लास्टिक देश की ऐसी समस्या बनकर रह गई है कि तमाम प्रयासों के बावजूद इस पर काबू नहीं पाया जा रहा है। Plastic Ban in India के बावजूद प्लास्टिक निर्मित वस्तुओं के निर्माण और बिक्री पर कोई खास अंकुश नहीं लग सका है। गत 1 जुलाई से फिर से देश में Single use Plastic Ban है। इस बार एक लाख रुपये तक का जुर्माना और 5 साल तक की सजा का प्रावधान है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि कई बार प्रतिबंध लगने के बावजूद इस समस्या का समाधान क्यों नहीं हो पा रहा है ? भले ही फिर Plastic ban हो पर केंद्र के साथ ही राज्यों की सरकारों की ओर से कोई खास इंतजाम इसके प्रति नहीं हो रहे हैं। 

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दरअसल सरकार की समस्या यह है कि Ban on Single use Plastic तो कर दिया जाता है पर निर्माण के रोक पर कोई खास ध्यान नहीं दिया जाता है। यदि ऐसा नहीं है तो इस बात की समीक्षा की जाये कि जब-जब प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा तो कितनी प्लास्टिक बनाने वाली फैक्ट्रियों पर छापा मारा गया ? कितने गोदाम सील हुए ? कितनी प्लास्टिक निर्मित वस्तुएं जब्त की गईं ? मतलब सरकार समस्या की जड़ में  ही नहीं जाती। यदि सरकार को वास्तव में प्लास्टिक निर्मित वस्तुओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना है तो प्लास्टिक निर्मित सामान निर्माण पर प्रतिबंध लगाना होगा। 

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Plastic Ban in Delhi : दिल्ली में भी सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन लगा दिया गया है। सिंगल यूज प्लास्टिक से बनी उन 19  वस्तुओं पर पाबंदी लगा दी गई है। प्रतिबंध गुब्बारों और आइसक्रीम में यूज होने वाले प्लास्टिक स्टिक से लेकर सिगरेट की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली फिल्म हैं, इस प्रतिबंध को सख्ती से लागू करवाने के लिए दिल्ली सरकार का पर्यावरण विभाग पूरी तरह से Plastic Ban in Delhi कर चुका है। आदेश का उल्लंघन करने वाले प्लास्टिक के सामान बनाने वाले, आपूर्तिकर्ता और वितरकों एवं विक्रेताओं पर कार्रवाई करेगा।

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किसी भी समस्या के समाधान के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर भी ध्यान देना होता है। यदि Ban on Single use Plastic किया जा रहा है तो उसकी जगह किन वस्तुओं का इस्तेमाल करना होगा ? इसकी व्यवस्था भी सरकार को करनी चाहिए। ऐसे में प्रश्न उठता है कि जो प्लास्टिक के सामान बन चुके हैं उनका क्या होगा ? क्या सरकार के पास प्लास्टिक के सामान बनाने वाली फैक्ट्रियों की लिस्ट है ? इन फैक्ट्रियों ने सामान बनाना बंद कर दिया है क्या ? अब इन फैक्ट्रियों में क्या बन रहा है ? प्लास्टिक निर्मित सामान बेचने ओैर ले जाने वालों पर तो कार्रवाई करने चालान काटने की खबरें आती हैं पर प्लास्टिक का सामान बनाने वालों पर नहीं ?

दरअसल थर्माकोल के थाली-कटोरी और पॉलीथिन बैग पर पूर्ण प्रतिबंध है। पकड़े जाने पर एक लाख रुपये का जुर्माना और 5  साल की जेल भी का प्रावधान है। Plastic Ban News यह है कि यह आदेश वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से जारी हुआ है। इस आदेश में single use plastic के निर्माण, भंडारण, वितरण, बिक्री और उपयोग पर रोक रहेगी। विभाग ने इस संदर्भ में 16   दिसंबर 2021 को ही अधिसूचना जारी कर कर दी थी। 

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हालांकि इस आदेश के अनुसार कम प्लास्टिक की परत वाले कागज के कप का इस्तेमाल जारी रहेगा, उन्हीं प्लास्टिक और थर्मोकोल पर प्रतिबंध रहेगा। सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल करते पकड़े जाने पर आम लोगों पर 500 से 2000 रुपये ओैर औद्योगिक स्तर पर इसका उत्पादन, आयात, भंडारण और बिक्री करने वालों पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1976 की धारा 15 के तहत दंड का प्रावधान होगा। अब देखना यह है कि Plastic Ban देश में का क्या असर पड़ता है।

ऐसे व्यवसायियों और उद्यमियों पर 20 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। पांच वर्ष तक की जेल या फिर दोनों सजा भी दी जा सकती है। थर्माकोल एवं प्लास्टिक प्लेट, कप, ग्लास, कांटा, चम्मच, चाकू, स्ट्रॉ और  ट्रे जैसे Single Use Plastic Ban है। तो क्या बजार से ये सभी चीजें गायब हो चुकी हैं ? मिठाई के डिब्बे, निमंत्रण कार्ड और सिगरेट पैकेट के ईग-गिर्द लपेटने या पैक करने वाली प्लास्टिक कोटेड फिल्में, थर्माकोल की सजावट सामग्री, प्लास्टिक स्टिक युक्त ईयर बड्स, बैनर, सौ माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टक या पीवीसी बैनर, गुब्बारों में लगाई जाने वाली प्लास्टिक की डंडिया, कैंडी स्टिक, आइसक्रीम की प्लास्टिक की डंडिया, प्लास्टिक के झंडे आदि पर पूर्ण प्रतिबंध है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि अब इनकी जगह क्या-क्या मिल रहा है ?

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