29 दिसंबर को भारतीय बाजार में चांदी की कीमतों में भारी उथल-पुथल देखी गई। MCX पर चांदी मार्च फ्यूचर्स ने सुबह रिकॉर्ड हाई ₹2,54,174 प्रति किलो छुआ, लेकिन कुछ ही घंटों में यह ₹21,000 से ज्यादा गिरकर ₹2,33,120 प्रति किलो तक पहुंच गई। यह गिरावट इतनी तेज थी कि एक घंटे में ही ₹21,500 प्रति किलो की कमी दर्ज की गई।
अचानक भूचाल (क्रैश) के मुख्य कारण
प्रॉफिट बुकिंग (लाभ बुकिंग): चांदी की कीमतें 2025 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी थीं (वर्ष में 100-175% तक उछाल)। निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर मुनाफा कमाने के लिए बड़े पैमाने पर बिकवाली की, जिससे कीमतें धड़ाम हो गईं। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी तेज रैली के बाद प्रॉफिट बुकिंग स्वाभाविक थी। ओवरहीटेड रैली का सुधार (तकनीकी करेक्शन): चांदी की कीमतें अत्यधिक तेजी से बढ़ी थीं, जो टिकाऊ नहीं थी। तकनीकी इंडिकेटर्स (जैसे RSI) ओवरबॉट जोन में थे, और कीमतें प्रमुख मूविंग एवरेज से बहुत दूर निकल चुकी थीं। इससे ऑटोमैटिक सेलिंग ट्रिगर हुई।
जियोपॉलिटिकल टेंशन में कमी: हाल की रैली का बड़ा कारण सुरक्षित निवेश की मांग थी (यूक्रेन-रूस या अन्य वैश्विक तनाव)। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति और यूक्रेनी नेता के बीच शांति वार्ता की खबरों से सेफ-हेवन डिमांड कम हुई, जिससे कीमतें गिरीं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर: ग्लोबल स्पॉट सिल्वर $80 प्रति औंस के ऊपर briefly पहुंचा, लेकिन फिर $75 से नीचे गिर गया। मजबूत अमेरिकी डॉलर और प्रॉफिट टेकिंग ने यहां भी दबाव बनाया। मार्जिन हाइक और स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग: CME या MCX पर मार्जिन बढ़ने से स्पेकुलेटिव पोजीशंस को क्लोज करना पड़ा, जिसने गिरावट को तेज किया। ऐतिहासिक पैटर्न: विशेषज्ञों (जैसे ICICI Prudential के CIO) ने चेतावनी दी थी कि चांदी की ऐसी स्पेक्टैकुलर राइज (जैसे 1980 या 2011 में) अक्सर 50-90% करेक्शन के साथ खत्म होती है।
वर्तमान स्थिति (29 दिसंबर 2025 अपराह्न तक)
MCX सिल्वर: ₹2,33,000-₹2,43,000 प्रति किलो के आसपास ट्रेडिंग। फिजिकल मार्केट (दिल्ली, मुंबई आदि): ₹2,50,000-₹2,58,000 प्रति किलो (स्थानीय टैक्स और डिमांड पर निर्भर)। लंबी अवधि में आउटलुक अभी भी बुलिश है (इंडस्ट्रियल डिमांड जैसे सोलर, EV से), लेकिन शॉर्ट टर्म में और करेक्शन संभव।








